आरोपियों में शिवराज रघुनाथ मोंटेगांवकर, तेजस हर्षद कुमार शाह, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, मांगी लाल बिवाल, यश यादव, प्रहलाद कुलकर्णी, डॉ. मनोज शिरुरे, धनंजय लोखंडे, शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंदारे और मनीषा संजय हवालदार शामिल हैं। उनकी पिछली न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरीए पेशी हुई। सीबीआई ने अदालत को सूचित किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने बताया कि दो-तीन लोगों पर संदेह है, जिनकी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।
सीबीआई के अनुसार, रसायन विज्ञान के पूर्व विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी पेपर लीक मामले का मास्टरमाइंड है। कुलकर्णी कई वर्षों तक नीट के प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले पैनल का हिस्सा रहे। उन्होंने एनटीए की प्रक्रिया का दुरुपयोग करके पुणे में विशेष कोचिंग कक्षाओं के माध्यम से छात्रों को पेपर लीक किया। शिवराज मोटेगांवकर लातूर में आरसीसी कोचिंग के संचालक थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, परीक्षा से करीब 10 दिन पहले ही उनके पास प्रश्नपत्र और उनके उत्तर पहुंच गए थे। आरोप है कि उन्होंने एनटीए के पैनल में शामिल कुछ लोगों, पीवी कुलकर्णी और मनीषा मंदारे के माध्यम से यह पेपर हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने कोचिंग संस्थानों और छात्रों को कथित तौर पर नीट यूजी पेपर देकर इस घटना को अंजाम दिया।
नीट यूजी 2026 की परीक्षा मूल रूप से 3 मई को आयोजित की गई थी। पेपर लीक के विवादों के कारण एनटीए ने इसे रद्द करके दोबारा 21 जून को कड़ी सुरक्षा और व्यापक निगरानी के बीच आयोजित किया था।