एनटीए प्रबंधन ने जेईई, यूजीसी नेट, नीट सहित अन्य प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट को फुलप्रूफ बनाने के एक खास क्यूआर कोड का प्रयोग किया है। इसमें हर छात्र का अलग कोड है। छात्र को संबंधित प्रवेश परीक्षा के रिजज्ट में मिले अंक को इनक्रिप्ट करके एक खास कोड में परिवर्तित कर दिए गए थे, जिस कारण छात्रों की हेराफेरी पकड़ी गई। इसके अलावा एनटीए ने एक खास सॉफ्टवेयर की मदद से एक फांट भी तैयार किया है, जिसे मार्क्सशीट व ओएमआर शीट में प्रयोग किया गया है।
केस 01 :
इसने 232180 को बनाया 23218 रैंक
छात्र को नीट परीक्षा में 232180 रैंक मिली थी। यानी की उसका पर्सेंटाइल 83.5 के आसपास था। छात्र ने फोटोशॉप के माध्यम से मार्क्सशीट में केमिस्ट्री व बायोलॉजी के अंकों में भी बदलाव कर दिया। इसके जवाब में एनटीए ने क्यूआर के जरिये हेराफेरी पकड़ ली और अभिभावकों को असली मार्क्सशीट ई-मेल कर दी।
केस 02 :
छात्र ने ओएमआर शीट ही बदल दी
छात्र को नीट परीक्षा में 154 नंबर मिले थे, जिसे उसने 554 अंक कर दिया। ओएमआरशीट को फोटोशॉप में बदलकर एक ओर निकाल ली। ई-मेल में उसके माता-पिता ने सवाल उठाते हुए कहा कि एनटीए विशेषज्ञों ने ओएमआर शीट और मार्क्सशीट में अलग-अलग नंबर दिए हैं। हालांकि, यह सब हेराफेरी छात्र ने की थी। इसके जवाब में एनटीए ने उन्हें असली मार्क्सशीट व ओएमआरशीट की कॉपी भेज दी। असल कॉपी एनटीए के पास है। छात्र ने अपनी ओएमआरशीट में अलग फांट का प्रयोग किया, जबकि एनटीए अपना विशेष फांट इस्तेमाल करती है।