साइबर सिटी में पिछले काफी समय से इंडस्ट्री और रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार बहुत धीमी है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के दूसरे बजट से इन्हें काफी उम्मीद है।
सभी को लगता है कि अबकि बार सरकार उनकी जरूर सुनेगी। रियल एस्टेट सेक्टर की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार लोन की ब्याज दरों में कटौती करे। वहीं गुडग़ांव के उद्योग नियमों के सरलीकरण और जीएसटी (गुड्स सर्विस टैक्स) की मांग कर रहे हैं।
आज गुडग़ांव की जो पहचान है उसमें यहां के उद्योगों की काफी बड़ी भूमिका है। मगर यही उद्योग दशक भर से अधिक उद्योग खुद को लाचारी की हालत में पा रहे हैं।
उद्यमियों का कहना है कि औद्योगिक विकास दर बेहद खराब है। लगातार यहां से औद्योगिक यूनिटों का पलायन हो रहा है। इसी वजह से उद्योगों का ढांचा कमजोर होता जा रहा है।
हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि मेक इन इंडिया को व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार को काफी कुछ करने की जरूरत है। अभी यह बातें सिर्फ हवा-हवाई ही हैं, जिसका कोई अर्थ नहीं है।
रियल एस्टेट सेक्टर मंदी के दौर से गुजर रहा है। घरों के खरीददार मार्केट में नहीं हैं। इसका कारण होम लोन की दरों का काफी महंगा होना है। सरकार को चाहिए कि वह ब्याज दरों को घटाने की घोषणा करे।
वहीं टैक्स सिस्टम में भी बदलाव की जरूरत पर भी सभी बल दे रहे हैं। आयकर में छूट की सीमा को बढ़ाने की मांग यह सेक्टर काफी समय से कर रहा है। उसकी ओर से इस छूट की सीमा पांच लाख रुपये तक करने की मांग की जा रही है।