देश की रक्षा सेनाओं में अनुशासन तोड़ने वालों के लिए दया व सहानुभूति का कोई स्थान नहीं है। रक्षा सेनाओं में केवल ईमानदार व वफादारी के उच्च आचरण वाले लोगों को रखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी भारतीय वायु सेना के फ्लाइट कैडेट की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए की है। याची को अपने सहकर्मी का डेबिट चुराकर उसके बैंक खाते से पांच हजार रुपये चोरी के आरोप में दिसंबर 2016 में बर्खास्त कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि चोरी करना याची के नैतिक आचरण को प्रदर्शित करता है। ऐसे कैडेट को वायु सेना में नियुक्त करने पर विचार नहीं किया जा सकता। यह फैसला खंडपीठ ने याची की याचिका खारिज करते हुए सुनाया है। याची ने शुरुआत में अपनी गलती मानने से इंकार कर दिया था लेकिन सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद जुर्म स्वीकार कर लिया था। इसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया था।
खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पायलट होने के नाते उसे लड़ाकू विमान उड़ाने की जिम्मेदारी दी जानी थी और उसके पास वायु सेना स्टेशन, उपकरणों से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारी होती। इसके मद्देनजर इस सेवा में रहने के लिए ईमानदारी व वफादारी बेहद जरूरी है।
कोर्ट ने इससे पहले याची के मामले में ट्रेनिंग रिव्यू बोर्ड (टीआरबी) को कुछ मानक तय करते हुए दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था। इस पर दोबारा विचार करने के बाद टीआरबी ने पाया था कि याची का आचरण अधिकारियों जैसा नहीं था और वह वायु सेना में कमीशन प्रदान करने योग्य नहीं है। इस फैसले को हाईकोर्ट ने भी सही माना।
खंडपीठ ने याची के इस तर्क को मानने से इंकार कर दिया कि सैनिक स्कूल व एनडीए में उसका आचरण बेदाग था और चोरी का मामला उसकी पहली गलती है। यह तर्क इस गलती को क्षमा करने का आधार नहीं हो सकता। एनडीए में तीन साल के प्रशिक्षण से भी याची ने ईमानदारी का पाठ नहीं सीखा।