दिल्ली एयरपोर्ट शून्य दृश्यता की स्थिति गुरुवार से ही बनने लगी थी। रनवे सफेद धुंध की चादरों में लिपटा हुआ था। ऐसे में कृत्रिम लाइट कर विमानों की आवाजाही कराई गई बावजूद सुबह छह बजे ही विमान पर असर पड़ने लगा। करीब पांच सौ विमान की आवाजाही प्रभावित हुई। सबसे ज्यादा प्रभाव घरेलू आगमन वाले विमान पर दिखा।
200 से अधिक 15 मिनट से 2 घंटे की देरी से उतरे। इसके अलावा अन्य शहरों के लिए उड़ान भरने वाले विमान भी काफी मशक्कत से उड़ान भरे। 190 से अधिक विमान इस वजह से प्रभावित हुए। घरेलू ही नहीं अंतरराष्ट्रीय विमान भी कोहरे की चपेट में आए। रवानबर वाले 52 से अधिक तो आने वाले 45 से अधिक विमान देरी से संचालित हुए। शायद ही कोई घरेलू व अंतराष्ट्रीय विमान अपने नियत समय से उड़ान भर सके। हालांकि कई विमानों को नियत समय से पहले भी रवानगी की गई।
उधर, रेलगाड़ियों के मुसाफिरों की भी मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। 200 से अधिक लंबी दूरी की ट्रेन ट्रैक पर ठिठक-ठिठक कर चली। हालांकि ज्यादातर ट्रेन बृहस्पतिवार रात को ही देरी से चली। शुक्रवार 10 बजे के बाद दृश्ता बढ़ने की वजह से ट्रेन अपनी-अपनी रफ्तार में चली। वाराणसी-नईदिल्ली वंदे भारत, बनारस-नई दिल्ली, प्रयागराज-नई दिल्ली समेत 25 से अधिक ट्रेन 3-5 घंटे देरी से अपने-अपने गंतव्य तक पहुंची। इसी तरह भुवनेश्वर राजधानी, पटना राजधानी, डिब्रूगढ़ राजधानी, लखनऊ तेजस, सप्तक्रांति, सत्याग्रह, हमसफर, दुरंतो समेत 100 से अधिक ट्रेन घंटों देरी से संचालित हुई। इसकारण यात्रियों को परेशान होना पड़ा।