-जलभराव रोकने के लिए पहली बार रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल
-31 मार्च तक पहले चरण की 100 प्रतिशत डी-सिल्टिंग पूरी हुई, दूसरा चरण 15 जून तक पूरा किया जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आगामी मानसून सीजन को देखते हुए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने व्यापक मानसून कार्ययोजना तैयार कर ली है। एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने योजना की जानकारी देते हुए कहा कि राजधानी के वीआईपी और प्रमुख क्षेत्रों में जलभराव रोकने, सफाई व्यवस्था मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यह कार्ययोजना स्मार्ट, स्वच्छ और तकनीक आधारित शहरी प्रशासन के विजन के अनुरूप तैयार की गई है। योजना में मानसून से पहले की तैयारी, बारिश के दौरान आपातकालीन व्यवस्था और मानसून के बाद क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च तक पहले चरण की 100 प्रतिशत डी-सिल्टिंग पूरी कर ली है, जबकि दूसरा चरण 15 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क की जीआईएस मैपिंग शुरू की गई है, जिससे जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी और प्रबंधन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि पहली बार ताज मानसिंह होटल के पास क्यू प्वाइंट क्षेत्र में भूमिगत नालों और कवर स्टॉर्म वाटर ड्रेन की जांच रोबोटिक तकनीक से की जा रही है। करीब 85 प्रतिशत सर्वे कार्य पूरा हो चुका है। यह तकनीक नालों में सिल्ट जमा होने, ब्लॉकेज और पानी रुकने वाले हिस्सों की पहचान करने में मदद करेगी। इसके लिए सुपर सकर मशीनों से डी-सिल्टिंग कराई जा रही है, जिस पर लगभग 3.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
अगले वर्ष लगभग 3,200 मीटर क्षेत्र में रोबोटिक तकनीक से डी-सिल्टिंग कराने की योजना बनाई है, जिसमें क्यू प्वाइंट, डीटीसी डिपो और दयाल सिंह कॉलेज क्षेत्र शामिल होंगे। इस परियोजना पर लगभग 43 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। फिलहाल क्षेत्र में पांच संवेदनशील जलभराव वाले स्थान पुराना किला, दयाल सिंह कॉलेज क्षेत्र, पंचकुइयां रोड, हनुमान मंदिर और सत्य सदन की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों में डी-वॉटरिंग पंप, डीजी सेट, मैनपावर और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है। साथ ही सीसीटीवी कैमरे और सेंसर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाए जा रहे है।