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एनडी तिवारी के बेटे रोहित की पत्नी को नहीं है कोई मलाल, जेल में सीख रही टैरो कार्ड रीडिंग

Mon, 15 Jul 2019 04:59 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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टैरो कार्ड रीडिंग सीक रही है अपूर्वा शुक्ला - फोटो : सोशल मीडिया
राजनेता एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर तिवारी की हत्या के मामले में गिरफ्तार उसकी पत्नी अपूर्वा शुक्ला तिहाड़ जेल में टैरो कार्ड रीडिंग में गहरी रुचि ले रही है। सप्ताह में दो दिन कार्ड रीडिंग क्लास में नियमित तौर पर उपस्थित रहकर अपूर्वा इस विधा की बारीकियां सीखने में जुटी हुई है। इसके साथ ही आगे पढ़ें कि वह जेल में और क्या-क्या कर अपने दिन काट रही है....
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Apoorva
क्लास के दौरान अपूर्वा सबसे आगे बैठती है, ताकि इस गुर को सीखने का कोई मौका ना छूटे। डेढ़ साल से जेल में कैदियों को टैरो कार्ड रीडिंग की शिक्षा दे रही डॉक्टर प्रतिभा सिंह ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस साल जेल में सात टैरो कार्ड रीडिंग सत्र हुए, जिनमें से छह में अपूर्वा कक्षा में मौजूद रही। 
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टैरो कार्ड के बारे में जानकारियां दे रहीं डॉक्टर का कहना है कि अपूर्वा पांच-छह साल पहले इस विद्या को सीखना चाहती थी, लेकिन उसे अब मौका मिला है। वह अक्सर चुपचाप रहती हैं, लेकिन कुछ नया सीखने के लिए काफी उत्सुक और आत्मविश्वास से पूर्ण भी दिखती है। 

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15-16 अप्रैल की रात रोहित शंकर तिवारी की गला घोंटकर हत्या करने वाली महिला के चेहरे पर इस कृत्य के लिए कोई मलाल नहीं है। गौरतलब है कि अपूर्वा की रोहित के साथ एक महिला के साथ शराब पीने के मामले में शुरू हुई बहस ने हत्या का रूप ले लिया था। प्रॉपर्टी विवाद के कारण अपूर्वा शादी के बाद से ही रोहित के साथ नाखुश थी और कई बार दोनों के बीच इस बात के लेकर नोकझोंक भी हुई थी।
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रोहित शेखर तिवारी और उनकी पत्नी अपूर्वा शुक्ला (फाइल फोटो)
जेल सूत्रों के मुताबिक, अभी तक अपूर्वा ने सात कक्षाओं के दौरान 78 में से 15 कार्ड रीडिंग की जानकारी हासिल कर ली है। क्लास के दौरान अपूर्वा खुद को अंग्रेजी में अधिक सहज महसूस करती है। इस विषय से संबंधित किसी विशेष जानकारी के लिए पूछने से भी अपूर्वा हिचकिचाती नहीं है। पहले सत्र में जब अपूर्वा से हत्या की इस घटना के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि मेरी किस्मत में कुछ ऐसा ही लिखा था, लेकिन मुझे किसी बात का अफसोस नहीं है। 
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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : SELF
डॉ. सिंह का कहना है कि सभी सत्र के दौरान अपूर्वा सहित अन्य कैदियों के विचार में भी धीरे-धीरे काफी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नई बातें सीखकर इन्हें अमल में लाने से उनके विचारों में सकारात्मक बदलाव भी दिखने लगे हैं।
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