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Delhi NCR News: एनसीआरटीसी ने छह वर्षों में छह कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट

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फर्जी प्रमाणपत्र, बोली वापस लेने और कार्य-निष्पादन गारंटी जमा नहीं करने पर कार्रवाई, दो कंपनियों पर 2027 और 2028 तक प्रतिबंध
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शनि पाथौली
नई दिल्ली। नमो भारत सहित अन्य परियोजनाओं से जुड़े ठेकों की निविदा प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन करने पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने पिछले छह वर्षों में छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया है। इन कंपनियों पर फर्जी प्रमाणपत्र जमा करने, बोली की वैधता अवधि के दौरान पीछे हटने और निर्धारित कार्य-निष्पादन गारंटी जमा नहीं करने के आरोपों में कार्रवाई की गई।
निगम ने संबंधित कंपनियों पर दो से पांच साल तक का प्रतिबंध लगाया है। इनमें कुछ कंपनियों की प्रतिबंध अवधि समाप्त हो चुकी है, जबकि दो कंपनियां अब भी प्रतिबंधित हैं। निगम की ओर से 2020 से सितंबर 2026 तक की गई कार्रवाई में निविदा नियमों के उल्लंघन के अलग-अलग मामले सामने आए। इन अनियमितताओं के कारण संबंधित परियोजनाओं के कार्य भी प्रभावित हुए।
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फर्जी प्रमाणपत्र देने पर पांच साल का प्रतिबंध
निगम की सूची के अनुसार, एक कंपनी ने निविदा प्रक्रिया में फर्जी प्रमाणपत्र जमा किया था। इस मामले में कंपनी पर 29 अप्रैल 2020 से 28 अप्रैल 2025 तक पांच साल का प्रतिबंध लगाया गया। निविदा प्रक्रिया में प्रमाणपत्रों के आधार पर बोलीदाता की पात्रता और तकनीकी योग्यता का आकलन किया जाता है। ऐसे में फर्जी दस्तावेज जमा करना गंभीर अनियमितता माना जाता है। एक अन्य कंपनी ने बोली की वैधता अवधि के दौरान अपनी बोली वापस ले ली थी। इस पर 2021 से 2024 तक का प्रतिबंध लगाया गया।
गारंटी जमा नहीं करने पर तीन कंपनियों पर कार्रवाई
निर्धारित कार्य-निष्पादन गारंटी जमा नहीं करने के मामले में तीन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। पहली कंपनी पर 2022 से 2025 तक तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया। इस मामले में बोली सुरक्षा घोषणा के तहत कार्रवाई हुई। दूसरी कंपनी पर 2024 से 2026 तक दो साल का प्रतिबंध रहा, जबकि तीसरी कंपनी पर 2026 से 2028 तक प्रतिबंध लगाया गया है।
बोली वापस लेने पर दो साल की रोक
एक अन्य कंपनी के खिलाफ भी बोली की वैधता अवधि के दौरान पीछे हटने पर कार्रवाई की गई। इस कंपनी पर 2025 से 2027 तक दो साल का प्रतिबंध लगाया गया है। निर्धारित अवधि में बोली वापस लेने से निविदा प्रक्रिया में देरी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है।
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इसलिए कार्रवाई के दायरे में आईं कंपनियां
एनसीआरटीसी नमो भारत सहित सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं के निर्माण, तकनीकी व्यवस्था, रखरखाव और अन्य सेवाओं के लिए कंपनियों को ठेके देता है। इन कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता ठेकेदारों की क्षमता तथा अनुबंध की शर्तों के पालन पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि कोई कंपनी अनियमितता करती तो संबंधित काम प्रभावित होता है।
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