अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में पराली (फसलों के अवशेष) जलाने की तस्वीरें जारी की हैं, जिसमें दिखाया गया कि इसकी वजह से वायु प्रदूषण किस कदर बढ़ा है। 10 अक्तूबर की इन तस्वीरों को दिल्ली सरकार ने भी साझा किया है। ये तस्वीरें पंजाब, हरियाणा और उससे सटे इलाकों की हैं। इसकी वजह से मंगलवार शाम दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘खराब’ दर्ज किया गया। पराली जलाने से बुधवार को भी वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई।
दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 299 दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार शाम को यह 275 था। यहां पीएम 2.5 का स्तर 232, पीएम 10 का स्तर 233 रहा, जो खराब माना जाता है। वहीं, दिल्ली से सटे गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और लोनी देहात के आसपास इलाकों में एक्यूआई 300 को पार कर चुका है।
नासा की तस्वीरों में दि
खाया गया है कि कैसे उत्तर पश्चिमी भारत और सीमा से सटे पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, खेतों को साफ करने के लिए पराली जलाई जाती है। हालांकि इस प्रक्रिया में कटौती को लेकर कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन हर साल यह आसपास के राज्यों के लिए सिरदर्द है। इस साल कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, क्योंकि नासा द्वारा जारी तस्वीरों में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने में थोड़ी कमी दिखाई दी है।
हर साल नवंबर में बढ़ती है परेशानी
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत ने इस समस्या को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को पत्र लिखा है। गहलोत ने दावा किया कि पड़ोसी राज्यों में हर साल नवंबर में पराली जलाई जाती है, जिस वह से दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ जाता है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए डीजल जनरेटरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि आपात और आवश्यक स्थिति में इनका इस्तेमाल हो सकता है।
एक्यूआई के मानक
- 0 से 50 बेहतर
- 51 से 100 संतोषजनक
- 101 से 200 सामान्य
- 210 से 300 खराब
- 301 से 400 बेहद खराब
- 401 से 500 गंभीर