दिल्ली मेट्रो के फेज-तीन प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की बाधा अब उपराज्यपाल नजीब जंग के दरबार में ही दूर होगी।
क्योंकि, डीएसआईआईडीसी, डीयूएसआईबी, एमटीएनएल, जल बोर्ड अपनी-अपनी जमीन के लिए सर्किल रेट या बाजार कीमत मांग रहे हैं। शहरी विकास मंत्रालय अन्य राज्यों का हवाला देकर आपत्ति जता चुका है।
मंगलवार को मुख्य सचिव एसके श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी की बैठक में भी फैसला नहीं हो सका है। वहीं, बैठक में बीएसईएस ने डीएमआरसी से बकाया राशि दिलवाने की गुहार भी लगाई है।
केंद्र सरकार नहीं देगी पैसा
मेट्रो फेज-तीन के 112 किमी प्रोजेक्ट में करीब एक दर्जन जगह स्थायी तौर पर अधिग्रहण किया जाना है।
इसके लिए विभागों की मांग मानी जाए तो 1003.48 करोड़ रुपये का बोझ डीएमआरसी पर पड़ेगा। केंद्र सरकार ने यह कहकर पैसा देने से इनकार कर दिया है कि जो निर्धारित कीमत है वहीं दें। ऐसे में दिल्ली सरकार पर सीधा बोझ आएगा।
मामले में डीएमआरसी प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने पत्र लिखकर अगस्त, 2013 में सरकार को अवगत कराया था लेकिन चुनावी तैयारी में जुटी सरकार कोई फैसला नहीं कर सकी थी।
प्रोजेक्ट पर लटक रही देरी की तलवार
डीएमआरसी ने हाई पावर कमेटी की बैठक में साफ किया है कि जो भी फैसला हो जल्द करके कब्जा दिलवाएं, भूमि नहीं मिलने के कारण प्रोजेक्ट पर देरी की तलवार लटक रही है।
आनंद विहार बस अड्डा के पास एक जमीन का टुकड़ा मेट्रो और मांग रहा है जिसके लिए तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत चुकानी है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली करीब पौने घंटे चली बैठक में तय कर दिया गया है कि टेंपरेरी जमीन दें, लेकिन बैठक में डीएमआरसी अधिकारियों ने कहा कि टेंपरेरी इस्तेमाल के लिए तीन जगह चाहिए जबकि स्थायी तौर पर 12 साइट चाहिए।
सबको मानना पड़ेगा एलजी का निर्णय
मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि जल्द एक प्रस्ताव तैयार करके उपराज्यपाल नजीब जंग के समक्ष रखा जाएगा। अभी राष्ट्रपति शासन है तो अंतिम जो भी निर्णय वहां होगा, वही सभी को मानना होगा।
कड़कड़डूमा में एमटीएनएल, राजौरी गार्डन, त्रिलोक पुरी व जीटी रोड सीलमपुर में डीयूएसआईबी, कड़कड़ी मोड़ व नारायणा फ्लाईओवर के पास डीएसआईआईडीसी और मुकुंदपुर डिपो, बिहारी कालोनी, विनोद नगर, सरिता विहार व आजादपुर में जल बोर्ड की जमीन के अधिग्रहण की जरूरत है।