कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में पिछले दिनों शुरू किए गए एक अनोखे स्कूल ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। छात्र और बाल विकास के लिए कार्य करने वाले नफी मोहम्मद नासिर ने कोरोना महामारी के दौरान बंगलूरू में फंसे मजदूरों के बच्चों के लिए इस पहल की शुरुआत की थी। कोरोना के बाद लॉक्डाउन के वक्त श्रमिक मजदूरों के बीच अफरातफरी सी मच गई थी। अधिकांश मजदूरों ने अपनी नौकरिया खो दीं।
एक लंबे अंतराल के बाद बड़ी संख्या में मजदूर बड़े शहरों की ओर वापस आ रहे हैं, लेकिन उनके लिए उचित नौकरी पाना अभी भी कठिन हो रहा है। ऐसे में उन मजदूरों के बच्चों की शिक्षा को भी नुकसान पहुंच रहा है। इन्हीं कारणों से नफी मोहम्मद नासिर ने एक निशुल्क श्रमिक स्कूल की स्थापना कर दी।
इस विद्यालय में बच्चों की भाषा, खेल, कला, नृत्य, गायन, सामान्य ज्ञान की शिक्षा के साथ उनके भोजन का भी इंतजाम होता है। यहां योगदान देने वाले सभी शिक्षक बड़ी कंपनियों में नौकरी करने वाले कर्मचारी हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए नफी ने कहा “हर इंसान का समाज के प्रति कर्तव्य होता है, मेरा भी है। अगर मेरे थोड़े से समय और संसाधनों से कुछ नन्हीं जिंदगियां संवर सकतीं हैं तो इससे बड़ी बात क्या होगी।आवश्यकता है कि समाज के ढेर सारे सम्पन्न लोग अपने स्तर पर ऐसी कोशिशें करते रहें।"