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ट्रिपल तलाक कानून पर मुस्लिम महिलाओं ने जताया आभार

Sat, 29 Dec 2018 01:26 AM IST
vivek shukla ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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तीन तलाक बिल को लोकसभा में मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार को मुस्लिम महिलाओं ने सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अभी तक मुस्लिम समाज में ईमेल और व्हाट्सएप तक पर तीन तलाक भेजा जाता है। कई महिलाएं इसकी शिकार हुई हैं। वहीं, मुस्लिम महिलाओं ने केंद्रीय मंत्री विजय गोयल के आवास पर एकत्रित होकर तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के खिलाफ ऐतिहासिक कानून लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया। तीन तलाक बिल (2018) को लोकसभा ने पारित होने के बाद अब इसे राज्यसभा में मंजूरी के लिए 31 दिसंबर को पेश किया जाएगा।

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इस अवसर पर केंद्रीय संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने कहा कि लोक सभा में बिल पास होने के बाद राज्य सभा में भी यह बिल पास करने के लिए वे दूसरी पार्टी के नेताओं से संपर्क करेंगे। इस बिल को राजनीति या धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। जिन पार्टियों ने लोक सभा में इस बिल को समर्थन दिया है, उम्मीद है वे राज्य सभा में भी इसका विरोध नहीं करेंगी।

इससे पहले दिसंबर 2017 में भी लोकसभा से तीन तलाक बिल को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन राज्यसभा में गिर गया था। इसके बाद सितंबर 2018 में सरकार ने तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के लिए अध्यादेश लाया, जिसके तहत तीन तलाक को अपराध घोषित करते हुए पति के लिए तीन साल तक की जेल और जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया।
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विजय गोयल ने कहा कि 1400 साल पुरानी तलाक-ए-बिद्दत प्रथा देश की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के लिए अभिशाप की तरह है। तीन तलाक के खिलाफ कानून देश की मुस्लिम बहनों के लिए बदलाव की नई बयार लेकर आया है। बातचीत में संसदीय कार्य राज्यमंत्री ने विश्वास जताया कि मुस्लिम समाज के विकास में मील का पत्थर बनने वाला यह बिल राज्य सभा में भी पास हो जाएगा और इसमें विभिन्न विपक्षी दल भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश की मुस्लिम महिलाओं के हक में सहयोग करेंगे।
 
उन्होंने कहा कि कई सारे मुस्लिम देशों जिसमें हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल हैं, उनमें तीन तलाक पर बैन है। फिर भारत तो एक धर्मनिरपेक्ष देश है। ऐसे में किसी भी समाज की महिलाओं के साथ धर्म के नाम पर भेदभाव करके उनका जीवन बर्बाद होने नहीं दिया जा सकता। मुस्लिम मंच के प्रवक्ता यासीर जिलानी ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया। कहा कि अब तीन तलाक की आड़ में महिलाओं के साथ कोई भी अत्याचार नहीं कर सकेगा। 

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