मामले की सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि हमें लगता है कि इस केस में हमारा दखल सही है क्योंकि याचिकाकर्ता को जो नुकसान हुआ, उसे उम्रभर नहीं भरा जा सकता था।याचिकाकर्ता को फोर्स में ज्वॉइनिंग दी जाती है तो वह महिलाओं और समुदाय के लिए उदाहरण साबित होंगी।
कोर्ट ने अपने जांच में पाया कि याचिकाकर्ता यूपी के जालौन जिले की रहने वाली है। वह एक युवा मुस्लिम हैं और एक कट्टरपंथी परिवार से ताल्लुक रखती है। सीआईएसएफ ज्वॉइन करने के लिए फातिमा ने कड़ी मेहनत की थी।
फातिमा ने अपने याचिका में बताया था कि सपने को पूरे करने में परिवार ने कोई भूमिका नहीं निभाई है। उन्होंने थोड़ा बहुत भी सपॉर्ट नहीं किया है। जॉइनिंग के महज 10 दिन पहले फातिमा का टखना चोटिल हो गया और डॉक्टरों ने 3 हफ्ते का बेड रेस्ट करने के लिए कहा।