दस महीने पहले तत्कालीन सीजेएम रवनीत गर्ग की पत्नी गीताजंलि हत्याकांड को लेकर जिस प्रकार पूरा शहर उसके इंसाफ के लिए एक साथ खड़ा हो गया था।
पुलिस से लेकर सीबीआई तक जांच में जुट गई। सोशल मीडिया से लेकर कैंडल मार्च शुरु हो गए, लेकिन कुछ ही महीनों में बदले दौर के बाद लोगों की की यादों पर ऐसी परत चढ़ गई कि वे उस गीतांजलि को भूल ही गए।
दस महीनों में कार्रवाई के नाम पर चंद घोषणाएं हुई, लेकिन शहर, सीबीआई और परिवार उसे याद नहीं रख पाया।
बरामद हुई थी जज पति की रिवॉल्वर
17 जुलाई 2013 को हुए हत्याकांड के बाद गीतांजलि के परिजनों ने सीजेएम रवनीत गर्ग समेत उसकी चचेरी बहन हिना और परिवार के लोगों पर हत्या का प्रताड़ित करने और हत्या का आरोप लगाया था।
जांच में सामने भी आया था कि घटनास्थल से जो लाइसेंसी रिवॉल्वर बरामद हुई थी वह भी सीजेएम के नाम पर है। इस मामले के बाद शहर के सामाजिक संगठनों के अलावा सोशल मीडिया में जस्टिस फॉर गीतांजलि की आवाज गूंज उठी थी।
प्रदर्शन, कैंडल मार्च और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के दौर के बाद पुलिस की एसआईटी की जांच में हाथ खाली होने के बाद सीबीआई को सौंपा गया था, लेकिन दस महीने की प्रक्रिया के बाद सीबीआई की कार्रवाई केवल यहां तक बढ़ी जिसमें उन्होंने सुराग देने वालों को पांच लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की।
हर तरफ फैला है सन्नाटा
इन सब कड़ियों के बीच फिलहाल गीतांजलि को लेकर न तो उस शहर में उसके इंसाफ की आवाज गूंज रही है और न ही जांच प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
उधर, गीतांजलि के परिजनों का कहना है कि इस मामले में कमजोर बनाने के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर मानसिक रुप से कमजोर किया जा रहा है।
उसकी दोनों बेटियों को उनसे दूर रखा जा रहा है। इन सबके बीच जांच प्रक्रिया में हर तरफ केवल चुप्पी ही दिखाई पड़ रही है।
कुछ इस तरह मामला सामने आया
17 जुलाई की रात को पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड की झाड़ियों में सीजेएम की पत्नी गीतांजलि का शव संदिग्ध हालत में मिला। जिसमें उसके शरीर पर तीन गोलियां लगी हुई थी।
शव के बगल में पुलिस को एक रिवॉल्वर मिली जो सीजेएम की लाइसेंसी थी। जानकारी में पता चला कि घटना वाले दिन शाम चार बजे से पहले गीतांजलि बिना मोबाइल और सरकारी वाहन लिए घर से बाहर निकली थी।
जुलाई से अबतक गुड़गांव में ठहरी सीबीआई टीम कई बार घटनास्थल का दौरा कर चुकी है लेकिन जांच कहां तक आगे बढ़ी इसे लेकर किसी को कोई जानकारी नहीं है।
परिवार के सुलगते सवाल
-गीतांजलि मामले में अबतक एक भी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
-रवनीत गर्ग की चचेरी बहन उस वक्त घर पर मौजूद थी। उसने बताया कि घर से निकलने से पहले गीतांजलि खाना खाकर आती थी, लेकिन पोस्टमार्टम में इसको नकार दिया गया?
-रिवॉल्वर से छह गोलियां चली थीं, जिसमें तीन गीतांजलि को लगी तो बाकी की तीन गोलियां कहां है?
-अभी तक यह पता नहीं चला कि गीताजंलि की हत्या कहां हुई?
-दस दिन बाद सीबीआई को संभाली जांच के बाद अबतक कोई परिणाम आखिर सामने क्यों नहीं आया?
-जांच कर रही सीबीआई ने पिछले महीने इंवेस्टिगेशन ऑफिसर को अचानक क्यों बदला?
कौन सुनेगा इनका दर्द?
गीतांजलि के पिता ओमप्रकाश अग्रवान ने अपना दर्द सुनाते हुए कहा कि अपनी बेटी को खोए हुए नौ महीने से ज्यादा हो गए है। एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब हमने उसे याद नहीं किया गया। पहले पुलिस ने खानापूर्ति की अब सीबीआई उसी रास्ते पर चल रही है।
हमारी दोनों नातिन (गीताजंलि की दोनों बेटियां) को हमसे दूर रखा जा रहा है। भगवान ऐसा किसी के साथ भी न करें अब तो हम बस, इंसाफ के लिए इंतजार कर रहे हैं।
कब क्या हुआ था
17 जुलाई: शाम को गुड़गांव पुलिस लाइन में सीजेएम रवनीत गर्ग की पत्नी गीतांजलि का शव मिला।
18 जुलाई: गीताजंलि का पोस्टमार्टम हुआ
19 जुलाई: मामले की जांच के लिए डीसीपी वेस्ट ने एसआई का गठन किया।
20 जुलाई: रात के समय पुलिस ने रवनीत गर्ग, उनकी मां रचना गर्ग के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया।
21 जुलाई: एसआईटी ने सीजेएम से चार घंटे तक पूछताछ की।
22 जुलाई: सीजेएम के घर में एसआईटी का सर्च अभियान, चचेरी बहन हिना, मां रचना गर्ग का बयान दर्ज करने के साथ सीजेएम का मोबाइल, लैपटॉप, रिवॉल्वर का लाइसेंस, बची हुई 19 गोलियां जब्त की। गीतांजलि के बयान के बयान के आधार पर फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) और एसआईटी ने सीजेएम के घर फिर छानबीन की।
27 जुलाई: राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद सीबीआई ने जांच को अपने हाथ में लिया।