एडीएम सिटी ने फीस वृद्धि वापसी पर विचार को दी सात दिन की मोहलत
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नगर निगम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने अपनी मांग को लेकर निगम मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किया और निगम प्रशासन
से वर्षों पहले निकाले गए कर्मचारियों को तत्काल नियुक्ति पत्र देने की मांग की।
धरने का नेतृत्व सीबी सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहाकि जब तक उनकी मांग मान नहीं ली जाती विरोध जारी रहेगा। क्योंकि
सरकार के आदेश का पालन निगम के कुछ शरारती अधिकारी नहीं करने दे रहे हैं।
कर्मचारी नेताओं का कहना था कि वर्ष 1995 में निगम में कार्यरत 187 कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया था। बाद में 157
कर्मचारियों ने श्रम न्यायालय में चले गए। एक फरवरी 2013 को श्रम न्यायालय से केस जीत गए।
इसके बाद सरकार हाईकोर्ट चली गई। हाईकोर्ट में भी कर्मचारियों ने 3 दिसंबर 2015 को केस जीत गए। कर्मचारियों ने इस सात
करोड़ 43 लाख रुपये एरियर को छोडने का ऐलान कर दिया।
इस पर सरकार ने अवमानना से बचने के लिए एक अक्तूबर 2003 से ही निकाले गए कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश
निगम प्रशासन को दिया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि निगम में कार्यरत कुछ शरारती तत्व अधिकारी व कर्मचारी
नियुक्ति में बाधा बने हुए हैं।
इसके पूर्व बृहस्पतिवार को भी यूनियन के लेगों ने अतिरिक्त निगमायुक्त पार्थ गुप्ता से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी थी।
उनका कहना है कि जब तक कोर्ट और सरकार के आदेश का पालन नहीं हो जाता, आंदोलन जारी रहेगा।