लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को विधायक कृष्णानंद हत्याकांड मामले में भी सीबीआई कोर्ट से भी सशर्त कस्टडी पेरोल मिल गई।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वे प्रात: 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ही प्रचार के लिए बाहर रहेंगे और रात उन्हें जेल में ही काटनी होगी।
इसके सुरक्षा व अन्य सभी खर्च वहन करने होंगे। साथ ही चेतावनी दी गई है कि वे न तो गवाहों को प्रभावित करेंगे न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़। इससे पूर्व अंसारी को मकोका मामले में पेरोल मिल चुकी है।
एस्कार्ट टीम के हिरासत में रहेंगे अंसारी
तीस हजारी स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एके मेंहदीरत्ता के समक्ष सीबीआई ने कस्टडी पेरोल पर आपत्ति जताई। अदालत ने उनके तर्कों को खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि अंसारी को वर्ष 2012 में यूपी विधानसभा के चुनावों के दौरान भी पेरोल प्रदान की गई थी।
इसके अलावा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सविता राव ने भी एक मामले में तीस अप्रैल 2014 को मुख्तार अंसारी को एक मई से दस मई तक दस दिन की कस्टडी पेरोल प्रदान की थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे में वे अंसारी को सीबीआई हिरासत में पेरोल स्वीकार करते है। उन्होंने कहा कि इस मामले के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर अमित कुमार व एस्कार्ट टीम तीन मई से 10 मई तक अंसारी को अपनी हिरासत में रखेगी।
प्रचार के आलावा ये किया तो तुरंत होगी कार्रवाई
इन सबका खर्च अंसारी वहन करेंगे और वे गवाहों से संपर्क नहीं करेंगे। अदालत ने कहा कि यदि इस शर्त का उल्लंघन किया जाता है तो जांच अधिकारी तुंरत कार्रवाई करेंगे।
अंसारी के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को पहले भी एक अन्य मामले में पेरोल मिल चुकी है और उनकी पेरोल से ट्रायल प्रभावित नहीं होगा। इस मामले में सुनवाई 25 मई तय है।
सीबीआई ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अंसारी का आपराधिक रिकार्ड रहा है और वह संगठनात्मक आराधिक सिंडिकेट चलाता है। गवाहों की जान को खतरा देखकर ही सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई गाजियाबाद से दिल्ली की थी।