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आदर्श गांव की स्थिति ऐसी तो बाकियों की कैसी होगी?

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लालकिला से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से अपने क्षेत्र के कम से कम एक गांव को आदर्श गांव का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका अदा करने का आह्वान किया है।
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उन्हें लगता है कि ऐसे गांवों में तमाम सुख सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके आसपास के गांवों को भी इसके लिए प्रेरित किया जा सकता है। लेकिन जमीनी सच्चाई थोड़ा हटके है।

गुड़गांव और मेवात के आदर्श गांव हों या निर्मल गांव इनकी स्थिति में खास बदलाव नहीं आया है। गांव को यह तमगा मिलने से पहले जो स्थिति इन गांवों की थी कमोबेश आज भी वही है।
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मेवात का गांधी ग्राम घासेड़ा

इस गांव के नाम पर खूब सियासत होती है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब भी मेवात आते हैं इसका नाम लिए बगैर नहीं रहते। इसकी वजह यह है कि उनके पिता रण सिंह हुड्डा और मेवात के बाबा-ए-कौन कहे जाने वाले चौधरी यासीन खान की पहल पर महात्मा गांधी ने 19 दिसंबर 1947 को गांव घासेड़ा में मेवात छोड़कर पाकिस्तान जाने वाले मुसलमानों को रोका था।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री बने तब 2007 में इसे आदर्श गांव घोषित कर दिया। तब से यह गांव गांधी ग्राम घासेड़ा के नाम से जाना जाता है। लेकिन पिछले सात सालों में इस गांव की तस्वीर नहीं बदली।

ग्रामीण बताते हैं कि गांव की गलियों को पक्का करने के अलावा आदर्श गांव घोषित करते समय जितने की बातें कही गई थीं। उनमें से अधिकांश आज तक पूरी नहीं हुईं।
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बदतर है आदर्श गांव की स्थिति

गांव की ताजा स्थिति है कि गांव तक पानी पहुंचाने के लिए बनाए गए पांच चैंबर से आज तक घरों तक पानी नहीं पहुुंच पाया। गांव में खेल स्टेडियम बनाने की बात कही गई थी। उसे आज तक पूरा नहीं किया गया।

यहां तक कि गांव में गांधी जी की प्रतिमा लगाने और स्मारक बनाने की घोषणा भी परवान नहीं चढ़ सकी। बिजली की जर्जर तारें नहीं बदली गईं। बंसीलाल की सरकार में गांव के स्कूल को अपग्रेड कर वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का दर्जा दिया गया था। लेकिन इसमें साइंस, कॉमर्स सहित अधिकांश विषयों के टीचर ही नहीं हैं।

आदर्श गांव की ऐसी दुर्दशा से भला आसपास के गांव कैसे प्रेरित हो सकते हैं। घासेड़ा के नाम पर बिजली फीडर बना हुआ है फिर भी यहां बिजली नहीं रहती। गांव में दिल्ली-अलवर रोड पर दो बस क्यू शेल्टर मंजूर है फिर भी इसे नहीं बनाया गया।
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