-यह मामला 7 अक्तूबर 2020 का है, जब करोल बाग के टैंक रोड इलाके में ट्रैफिक हेड कांस्टेबल राज कुमार गलत तरीके से पार्क किए गए वाहनों को हटाने की ड्यूटी पर थे
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया को 2020 के एक आपराधिक मामले में बरी कर दिया है। उन पर सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, ड्यूटी करने से रोकने के लिए बल प्रयोग करने और रास्ता रोकने जैसे आरोप लगाए गए थे। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने 15 मई को यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कानूनी सिद्धांतों के अनुसार एक ही मामले में कुछ धाराओं में बरी और कुछ में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसी आधार पर चंदोलिया को आईपीसी की धारा 341, 353, 356 और 34 के तहत भी राहत दे दी गई।
यह मामला 7 अक्तूबर 2020 का है, जब करोल बाग के टैंक रोड इलाके में ट्रैफिक हेड कांस्टेबल राज कुमार गलत तरीके से पार्क किए गए वाहनों को हटाने की ड्यूटी पर थे। शिकायत के अनुसार, एक स्कूटर हटाने की कार्रवाई के दौरान योगेंद्र चंदोलिया ने कथित रूप से क्रेन का रास्ता रोका, बहस की और वहां मौजूद लोगों को उकसाया। पुलिसकर्मी का आरोप था कि जब उन्होंने घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की तो चंदोलिया ने उन्हें क्रेन से नीचे खींचने और मोबाइल फोन छीनने की कोशिश की। बाद में आरोपी के एक साथी द्वारा फोन ले जाने का भी आरोप लगाया गया।
योगेंद्र चंदोलिया ने अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। उनके वकील ने अदालत में कहा कि मामले में न तो कोई स्वतंत्र गवाह है, न सीसीटीवी फुटेज और न ही चोट से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया था। हालांकि, इससे पहले पुनरीक्षण अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया था और कहा था कि मेडिकल रिपोर्ट या सीसीटीवी फुटेज की गैरमौजूदगी के आधार पर इस स्तर पर आरोप खत्म नहीं किए जा सकते। बाद में मामले की दोबारा समीक्षा के बाद न्यायाधीश ने कहा कि सांसद के खिलाफ कानूनी रूप से आरोप तय करना संभव नहीं है और उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।