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किसानों का आंदोलन खिंच सकता है लंबा, रणनीति बता रही है आगे की रंगत

Mon, 28 Dec 2020 04:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान - फोटो : पीटीआई
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भीषण सर्दी में भी कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर डटे हुए हैं। 29 दिसंबर को हालांकि केंद्र से बातचीत का प्रस्ताव रखा है। बावजूद इसके किसानों की तरफ से हरियाणा के सभी टोल प्लाजा फ्री करने, केएमपी पर ट्रैक्टर मार्च सहित आगे की रणनीति को देखकर ऐसा नहीं लग रहा है कि आंदोलन जल्द खत्म होने वाला है।

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वार्ता के प्रस्ताव में तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने, दिल्ली-एनसीआर के शहरों की वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए जारी अध्यादेश से किसानों को बाहर करने, किसानों के हितों की रक्ष के लिए विद्युत संशोधन विधेयक-2007 के मसौदे में बदलाव और एमएसपी की गारंटी सुनिश्चित करना है। 

किसान नेताओं का कहना है कि सरकार से वार्ता के लिए किसान तैयार हैं, लेकिन उनकी मांगों को दरकिनार किए बगैर अगर सरकार किसानों की मांगें मान लेती है तो आंदोलन जल्द खत्म होने की संभावना है। किसान पहले से ही चार से छह महीने के लिए राशन लेकर आए हैं जबकि अपनी जरूरत के मुुताबिक टॉयलेट, ट्रॉली में सोने की जगह, लंगर सहित सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। 
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डायवर्जन से बढ़ी मुश्किलें
सिंघु सीमा से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले बसें मोड़ दी जाती हैं। नरेला जाने वाली बसें दो किलोमीटर पहले ही यात्रियों को छोड़ देती हैं। ऐसे में यात्रियों को पैदल चलना पड़ रहा है। वाहन चालकों को भी रूट डायवर्जन की वजह से अधिक दूरी तय करने में अधिक खर्च हो रहा है।

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