संक्रमण से बचाना मुश्किल काम था : डॉक्टर सोनी
आईसीयू फिजिशियन डॉक्टर कपिलदेव सोनी ने बताया कि अनुराग को संक्रमण से बचाना काफी मुश्किल काम था। उनके अंग सही से काम नहीं कर रहे थे। शुरुआती दौर में उन्हें स्थिर करने में लंबा समय लगा। धीरे-धीरे अंगों को प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। 72 घंटे तक बर्फ में फंसे रहने के कारण दिल और दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंची थी।
इसका असर इलाज में दिखा। ठीक होने के बाद भी अभी कुछ समस्या हैं। वह काफी कुछ भूल गए हैं, लेकिन हम उम्मीद कर रहे हैं कि समय के साथ यह धीरे-धीरे सब कुछ फिर से याद आ जाएगा। डॉ कपिल ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी, क्रिटिकल केयर, एनेस्थिसियोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफोलॉजी, ट्रॉमा सर्जरी, ईएनटी, मनोचिकित्सा और यूरोलॉजी सहित नौ विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर अनुराग की जान बचायी। ठीक होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
मिली दूसरी जिंदगी
34 साल के अनुराग ने बताया कि गड्ढे में गिरने के बाद मैं होश में था। 80 मीटर गिरने के बाद भी मैं होश में था। दो ट्रेंच में गिरा लेकिन मुझे फ्रैक्चर नहीं हुआ था। गड्ढे में भी मैं अपने गोप्रो कैमरे से वीडियो बनाता रहा। लेकिन अंतिम 12 घंटे में बेहोश हो गया था। उसके बाद क्या हुआ कुछ भी याद नहीं। वह बताते है कि डॉक्टरों ने मुझे दूसरी जिंदगी दी है। अस्पताल के बेड नंबर 9 पर मैंने करीब 5.5 महीने बिताए। उन्होंने कहा कि साल 2020 से पर्वत पर चढ़ना शुरू किया था और उम्मीद है कि एक बार फिर से ठीक होने के बाद फिर से इसे शुरू करूंगा।
यह पहला केस
डॉ. मनीष ने बताया कि अनुराग जैसा केस पहला है। हालांकि इससे पहले भी आर्मी बैकग्राउंड के मामले आए हैं। अनुराग जब आया तो वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर था और इनका डायलिसिस हो रहा था। सर्जरी से पहले इन्हें स्टेबल करना जरूरी थी। हमने आने वाले दिनों में कुछ और भी सर्जरी इनके लिए प्लान किया है।