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Garbage Woes : गाजीपुर में कूड़े का पहाड़ पेपर मार्केट के लिए बना अभिशाप, बर्बाद हो गया कागज का कारोबार

Mon, 21 Jul 2025 06:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा फिरदौस आलम, पूर्वी दिल्ली

सार

कभी कागज के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए इस मार्केट में आज सन्नाटा पसरा है। 
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गाजीपुर लैंडफिल साइट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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गाजीपुर में कूड़े का पहाड़ पूर्वी दिल्ली के पेपर मार्केट के लिए अभिशाप बन गया है। कभी कागज के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए इस मार्केट में आज सन्नाटा पसरा है। सरकार ने चावड़ी बाजार के व्यापारियों को लुभाने के लिए यहां 995 गोदाम खोलने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 631 छोटे-छोटे गोदाम ही दिए गए।

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ये गोदाम इतने छोटे थे कि कागज का कारोबार संभालना मुश्किल हो गया। नतीजा, ज्यादातर गोदामों पर ताले लटक गए और कारोबारी मायूस होकर यहां से चले गए। अब इन गोदामों में सॉफ्ट ड्रिंक, टाइल्स और अन्य सामान बिक रहे हैं, जबकि आसपास शराब की दुकानों ने कारोबारियों की मुसीबत और बढ़ा दी है।

कूड़े के पहाड़ की दुर्गंध और खराब बुनियादी ढांचे ने पेपर मार्केट को बर्बादी के कगार पर ला दिया। कारोबारियों का कहना है कि 50, 100, 150 और 200 वर्ग मीटर के गोदाम कागज जैसे बड़े कारोबार के लिए नाकाफी थे। कागज के कारोबार के लिए कम से कम 500 वर्ग मीटर का गोदाम चाहिए, जो यहां नहीं मिला।
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इस वजह से चावड़ी बाजार के कई व्यापारी गाजीपुर आए ही नहीं। जो आए, उन्हें कूड़े की बदबू और अव्यवस्था ने कारोबार बंद करने पर मजबूर कर दिया। कईयों ने घाटे में गोदाम बेच दिए। अब इस मार्केट में सिर्फ 30-40 कारोबारी बचे हैं, जो किसी तरह कागज का कारोबार चला रहे हैं।

वादे किए, पर हकीकत में सुविधाएं नहीं दीं : स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने बड़े-बड़े वादे तो किए, लेकिन हकीकत में सुविधाएं नहीं दीं। कूड़े के पहाड़ से होने वाली परेशानी और शराब की दुकानों से बढ़ता हुड़दंग कारोबार को और मुश्किल बना रहा है। 

यह मार्केट कभी चावड़ी बाजार का विकल्प बन सकता था, लेकिन अब यह खंडहर में तब्दील हो चुका है। व्यापारी प्रशासन से कूड़े की समस्या का स्थायी समाधान और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, ताकि उनका कारोबार फिर से पटरी पर आ सके।

पास में बूचड़खाने ने भी पहुंचाई चोट
मंडी के बराबर में बने बूचड़खाने ने भी इसे नुकसान पहुंचाने में अहम किरदार निभाया है। कारोबारी चावड़ी बाजार से पेपर मार्केट नहीं आए। इसके अलावा जिन लोगों ने बाजार के फैलाव में अपनी रुचि दिखाई, वह यहां की बदहाल स्थिति से परेशान होकर वापस चले गए। 

जलभराव से भी बढ़ी मुसीबत
कारोबारियों ने बताया, बारिश के दौरान मंडी में लबालब पानी भर जाता है। इससे ट्रांसपोर्ट प्रभावित होता है। मंडी में आने-जाने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा व्यापारियों के सामान पानी में भीग कर खराब हो जाते हैं। वहीं, कई साल से नालों की साफ-सफाई भी नहीं हुई है।

पेपर मार्केट को फिर से जीवित करने के लिए हम सब कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए व्यापारियों ने संगठन भी बनाया है। सरकार इसमें मदद करे, तो बाजार को विश्वस्तरीय बनाया जा सकता है। 
-संजय गेड़ा, अध्यक्ष, आईएफसी गाजीपुर वेलफेयर एसोसिएशन

कूड़े के पहाड़ की वजह से बदबू आती है। इससे आसपास के लोग बीमार हो रहे हैं। उन्हें सांस से संबंधित बीमारी हो रही है।  कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए सरकार कई साल से वादा कर रही है। रिश्तेदार आते हैं, तो वह भी ताना देकर जाते हैं।
-मुन्नी खातून, मुल्ला कालोनी निवासी

जब भी गुजरता हूं, यह कूड़े का पहाड़ नजर आता है। अस्थमे का मरीज, अगर एक बार यहां से निकल जाए, तो उसकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ जाएगी। दिल्ली में कितनी सरकारें आई और गईं, लेकिन यह कूड़े का पहाड़ नहीं गया। 
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- शाकिब अंसारी, राहगीर

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