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मां की एक बात से बदल गई एक हजार जिंदगी

Fri, 08 May 2015 10:21 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, गुड़गांव
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अपने घर में सबसे छोटे सुंदर सेहरावत करियर को लेकर चिंतित रहते थे। लेकिन मां की एक बात सुनकर अपने करियर की चिंता छोड़ दूसरे का करियर बनाने में जुट गए और आज हजारों बच्चों की जिंदगी में शिक्षा का दीप जला रहे हैं।
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मां ने कहा, अपने लिए तो सब जीते हैं, बेटा तुम दूसरों के लिए कुछ करो। मां की बात बेटे सुंदर के दिल में ऐसी जा बैठी कि उन्होंने 2003 में अपनी मां इंद्रावती के नाम से एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की और फिर शीतला विद्यापीठ।

सुंदर बताते हैं कि वे लोग पांच बहन और दो भाई हैं। पिताजी इंजीनियर स्टोर डिपो में पैकर्स के छोटे से ओहदे पर थे। घर के हालात भी अच्छे नहीं रहते थे। जिससे सभी बहनें किसी तरह मैट्रिक पढ़ीं।
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'तुम दूसरों के लिए कुछ करो'

घर में सबसे छोटा होने के कारण सभी ने मेरे ऊपर ध्यान दिया, लेकिन हर बार आर्थिक तंगी आड़े आती। बकौल सुंदर की मां खेतों में काम करती थी। सुंदर का कहना है कि उन्होंने स्नातक किया और उसके बाद महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) से बीएड की।

यहीं से नौकरी की जद्दोजहद शुरू हुई। लेकिन मां ने दूसरों के जीवन में उजियारा करने का सबक दिया। पिताजी जब सेवानिवृत्त हुए, तो ग्रेच्युटी के पैसे मिले। जिससे मैं अपना काम शुरू करना चाहता था।

लेकिन रिटायरमेंट के बाद पिताजी को भी लगता था कि बेटा कहीं डुबा न दे। मां ने मेरे ऊपर भरोसा दिखाया। पिताजी को भी समझाया और किसी तरह राजी हुए। इसके बाद पहले एजुकेशन सोसाइटी और फिर विद्यापीठ की नींव रखी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध इस विद्यापीठ में एक हजार से अधिक बच्चे शिक्षा ले रहे हैं।
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