अपने घर में सबसे छोटे सुंदर सेहरावत करियर को लेकर चिंतित रहते थे। लेकिन मां की एक बात सुनकर अपने करियर की चिंता छोड़ दूसरे का करियर बनाने में जुट गए और आज हजारों बच्चों की जिंदगी में शिक्षा का दीप जला रहे हैं।
मां ने कहा, अपने लिए तो सब जीते हैं, बेटा तुम दूसरों के लिए कुछ करो। मां की बात बेटे सुंदर के दिल में ऐसी जा बैठी कि उन्होंने 2003 में अपनी मां इंद्रावती के नाम से एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की और फिर शीतला विद्यापीठ।
सुंदर बताते हैं कि वे लोग पांच बहन और दो भाई हैं। पिताजी इंजीनियर स्टोर डिपो में पैकर्स के छोटे से ओहदे पर थे। घर के हालात भी अच्छे नहीं रहते थे। जिससे सभी बहनें किसी तरह मैट्रिक पढ़ीं।