दिल्ली से बाईपास होते हुए हरियाणा और यूपी को जोड़ने वाला ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे देश की अब तक की सबसे फास्ट कनेक्टिविटी देगा। 14 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस 170 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य जनवरी से शुरू हो जाएगा, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एक्सप्रेसवे गौतमबुद्धनगर के लगभग तीन दर्जन गांवों से गुजरेगा। इसमें ये अट्टा गुजरान, सिरसा, बील, शाहपुर, बंबावड़ से होते हुए क्षेत्र के 28 किलोमीटर को कवर करेगा।
इस पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन चलाए जा सकेंगे जिसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ग्रेनो क्षेत्र से होते हुए ये डासना, दुर्राई से गाजियाबाद सीमा में जाएगा।
इससे गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बागपत सीधे हरियाणा से जुड़ जाएंगे। ये एक तरह से एनसीआर के लिए रिंग रोड होगा। नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इसके लिए सभी तैयारियां कर ली हैं। इसके लिए गौतमबुद्धनगर के पड़ने वाले गांवों की जमीन को अधिग्रहित कर उन पर कब्जा ले लिया गया है।
एक्सप्रेसवे 6 लेन का बनाया जाएगा। वाहनों के तेज रफ्तार से चलने के लिए सड़क का निर्माण आधुनिक तकनीक से किया जाएगा। तेज स्पीड के चलते यमुना एक्सप्रेसवे पर टायर फटने से होने वाले हादसों को संज्ञान में रखते हुए ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे ऐसे हादसे न हों।
देश का सबसे फास्ट एक्सप्रेसवे
यमुना एक्सप्रेस वे पर 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने की व्यवस्था है। इसे सबसे अधिक रफ्तार से वाहनों के चलने के लिए बनाया गया था। अब उससे अधिक 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से वाहनों को चलने के लिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को बनाया जा रहा है। इसे बनाने के लिए ऐसी तकनीक को प्रयोग होगा, जिससे वाहन आसानी से तेज रफ्तार में चल सकेंगे।
तीनों प्रदेश के लोग होंगे लाभान्वित
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर बिना किसी जाम और अवरोध (रेड लाइट) के वाहन तेज गति से दौड़ सकेंगे। दिल्ली, हरियाणा और यूपी के लोग आसानी से इसके माध्यम से शहर के अंदर जाए बिना ही आ जा सकेंगे। ये यमुना एक्सप्रेसवे से दादरी के बील और कोट गांव के बीच में एनएच-91 को काटता हुआ निकलेगा।