सांसों को सांसत में डालने वाले प्रदूषण से बचने के लिए लोग बाजारों, बसों और मेट्रो में मास्क लगाए घूम रहे हैं। मास्क की बिक्री भी तेज हो गई है। उधर, डॉक्टरों का मानना है कि हवा में पीएम 2.5 से भी छोटे कण होने की वजह से ज्यादातर मास्क लाभ नहीं पहुंचा सकते।
किसी भी शोध में यह सामने नहीं आया है कि मास्क पीएम 2.5 या इससे छोटे आकार के प्रदूषकों से बचाने में असरदार हैं। छोटे कण सांस के जरिये फेफड़ों में पहुंचते हैं और फिर शरीर के सभी अंगों तक पहुंचकर नुकसान पहुंचाने लगते हैं। हालांकि बेहतर मास्क का इस्तेमाल किया जाए तो कुछ राहत मिल सकती है।
एम्स के डॉ. जावेद बताते हैं कि सामान्य सर्जिकल मास्क और धूल रोकने वाले मास्क भी किसी काम के नहीं हैं। ये छोटे आकार के कणों को सांस की नली में जाने से नहीं रोक पाते। मास्क खरीदने से पहले उसमें देखें कि फिल्टर और पहनने के लिए दो इलास्टिक होनी चाहिए। एक इलास्टिक वाले मास्क में कई जगह खुली छूट जाती हैं।
कई बार लोग मास्क पहने होते हैं, पर बाहर से हवा जाती रहती है। ऐसे मास्क पहनने से कोई फायदा नहीं होगा। एन-95 मास्क सबसे सुरक्षित माना जाता है। एन-95 का अर्थ है कि ये मास्क 95 प्रतिशत तक प्रदूषण को फेफड़ों तक जाने से रोक देते हैं।