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होम लोन के ब्याज पर मिले ज्यादा कर छूट

Wed, 23 Dec 2015 05:28 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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आवासीय क्षेत्र में आई सुस्ती को दूर करने के लिए पीएचडी चैम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने सरकार से होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कर छूट की वर्तमान 2 लाख की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने की मांग की है। इससे जहां मकान खरीदने वालों को राहत मिलेगी वहीं आवासीय क्षेत्र को भी फायदा होगा। संगठन के मुताबिक आयकर मद में छूट बढ़ाने से सरकार के खजाने में कम रकम नहीं आएगी क्योंकि दूसरी तरफ से उनकी झोली भरेगी।
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पीएचडीसीसीआई के नए अध्यक्ष और केंट आरओ सिस्टम्स के अध्यक्ष महेश गुप्ता ने यहां मंगलवार को संवाददाताओं केसाथ बातचीत में बताया, इससे ईएमआई में कमी होगी और लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचेगा। यही नहीं, यदि सरकार ऐसा करती है तो इससे रीयल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ाने में मदद भी मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि होम लोन की सर्विसिंग केलिए चुकाये गए ब्याज पर कर छूट की सीमा बढ़ाने से सरकार को घाटा नहीं होगा। इस मद में यदि आयकर में कम वसूली होती है तो दूसरी तरफ केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और सर्विस टैक्स के मद में सरकार की वसूली बढ़ेगी। इसलिए अंतत: सरकार को घाटा नहीं होगा क्योंकि रीयल एस्टेट क्षेत्र में मांग बढ़ने से इन करों की प्राप्ति का प्रतिशत भी बढ़ेगा।
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रियल एस्टेट के साथ गुप्ता ने श्रम कानून में बदलाव एमएसएमई सेक्टर के लिए नए नियम बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि हम एमएसएमई की सीमा में सरकार की तरफ से किए जा रहे बदलाव के पक्ष में है क्योंकि इससे रोजगार के अवसर में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि एमएसएमई को 30 दिन में भुगतान कराए जाने का नियम बनाया जाना चाहिए। वहीं इस क्षेत्र में कारोबार करने के नियमों को आसान बनाए जाने के लिए भी पहल की जानी चाहिए।

श्रम कानून में बदलाव पर गुप्ता ने कहा कि श्रम कानून के तहत कंपनियों को कंपनी बंद करने कर कारोबार से बाहर निकलने का आसान कानून बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति बढ़ाई जानी चाहिए। श्रम कानून निवेश के अनुकूल होना चाहिए ताकि देश में अधिक से अधिक निवेश हो सके।
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