सेकेंड-थर्ड पार्टी के रूप में पॉवर ऑफ अटर्नी के आधार पर खरीदी गईं प्रापर्टियों के मालिकों का इंतजार जारी है। जीडीए के ऐसी प्रापर्टियों की रजिस्ट्री की अड़चनों को दूर करने का प्रस्ताव एक बार फिर शासन में अटक गया है।
बीते वर्ष जीडीए ने शहर की करीब 15 हजार प्रापर्टियों की रजिस्ट्री शुरू करने का प्रस्ताव भेजा था। अभी तक इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
जीडीए के मूल आवंटी पावर ऑफ अटर्नी के आधार पर प्रापर्टियों की बिक्री कर चुके हैं। इन प्रापर्टियों की पावर ऑफ अटर्नी के आधार पर कई-कई बार बिक्री हो चुकी है।
शासनादेश के चलते जीडीए पावर ऑफ अटर्नी के आधार पर सिर्फ फर्स्ट पार्टी रजिस्ट्री ही करता है। बीते वर्ष ऐसी संपत्तियों का सर्वे कराने पर इनकी संख्या करीब 10,323 से बढ़कर करीब 15 हजार हो गई थी।
करीब एक दशक से इन प्रापर्टियों की रजिस्ट्री का मामला अटका हुआ है। पूर्व बसपा सरकार ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दी थी।
रजिस्ट्री न होने से प्रापर्टी मालिक तो परेशान हैं, शासन को 7 प्रतिशत (महिलाओं के लिए 6 प्रतिशत) स्टांप शुल्क और जीडीए को 2 प्रतिशत रजिस्ट्री शुल्क नहीं मिल पा रहा है।
बीते वर्ष जीडीए उपाध्यक्ष विजय यादव ने पावर ऑफ अटर्नी के आधार पर ली गईं सेकेंड-थर्ड पार्टी वाली रजिस्ट्रियों की सूची तैयार करवाई थी। इस सूची को शासन को भेजकर दिशानिर्देश मांगे गए थे।
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक बहुस्तरीय पावर ऑफ अटर्नी वाली प्रापर्टियों की सूची और इनकेसंबंध में निर्णय लेने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं।