पेयजल की गुणवत्ता के आधार पर जारी केंद्र की देशभर के राज्यों की रैंकिंग में सबसे आखिरी नाम दिल्ली का है। यानी यहां पेयजल को लेकर हालात सबसे खराब हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, दूषित पानी से इंसानों की जान को खतरा हो सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, दूषित पानी से हैजा, डायरिया, टाइफाइड और अन्य पेट से जुड़े रोग होते हैं। हाल ही में सामने आई राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल 2019 के अनुसार, दिल्ली में दूषित पानी की वजह से हैजे के काफी मामले सामने आ रहे हैं।
देश में हैजे के सर्वाधिक केस यूपी 24 के हैं और उसके बाद दिल्ली में 21 फीसदी हैं। वर्ष 2017 में दिल्ली में हैजे से 2 लोगों की मौत हुई थी। यह देश में सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति थी। इसी वर्ष 137 लोग हैजे से बीमार हुए थे। वर्ष 2018 में हैजे के कारण दिल्ली में 134 लोग अस्पताल पहुंच गए।
इसी तरह डायरिया से दिल्ली में वर्ष 2017 में 117 और 2018 में 127 रोगियों की मौत हुई थी। टाइफाइड को लेकर भी देश में सबसे ज्यादा खराब हालात वर्ष 2018 में यूपी और असम के बाद दिल्ली में मिले हैं। इससे यूपी में 224, असम में 83 और दिल्ली में 20 लोगों की जान चली गई थी।
दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों के मुताबिक, दूषित पानी से नवजात को सबसे ज्यादा खतरा होता है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में भी इसके गंभीर परिणाम दिखते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ निदेशक ने बताया कि दूषित पानी से फैलने वाले रोगों से देशभर में 10,738 मौतें हो चुकी हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि भारत में फूड पॉयजनिंग गंभीर मुद्दा है। दूषित पानी इसके पीछे बड़ी वजहों में से एक है। दूषित पानी से बचाव बेहद जरूरी है। दिल्ली के ज्यादातर घरों में केन का पानी सप्लाई होता है। ऐसे में जरूरी है कि शुद्ध पानी का ही सेवन करें। घरों में प्यूरीफायर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।