फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली की दहलीज पर मानसून, नालों की सफाई नहीं, गंभीर हो सकते हैं हालात

Fri, 05 Jul 2019 06:30 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

मानसून दस्तक देने के लिए दिल्ली की दहलीज पर है। यदि दो घंटे तक लगातार बारिश हो जाए तो सड़कें और गलियां लबालब होंगी। जलभराव से निपटने के लिए विभागों की तैयारियां पूरी होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन पक्की सड़कें, ढके और बंद नालों की वजह से जलभराव की समस्या इस बार फिर राजधानी में मुश्किलों का सबब बन सकती हैं। अभी भी दर्जनों जगह नालों के इर्द-गिर्द मलबा और गाद इकट्ठा है। विभागों की दलील है कि सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में नालों से गाद निकालने के बाद लैंडफिल साइट पर भेज दिया गया है। स्याह सच यह है कि अभी भी राजधानी के कई हिस्सों में नालों के बाहर की सफाई नहीं की गई है।

विज्ञापन


नालों की सफाई में एमसीडी, बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई, डीएसआईडीसी, पीडब्ल्यूडी, रेलवे और दिल्ली विकास प्राधिकरण के अलावा रेलवे क्षेत्र भी है। विभागों के दावों की सच्चाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है अभी भी कई क्षेत्रों में नालों में पॉलीथिन, मलबा और गाद इतना अधिक भर चुका है कि बारिश के पानी की निकासी नहीं हो सकती है। ऐसे में नालों के भरने के बाद सड़कों पर जगह-जगह जलभराव के हालात से लोगों को जूझना पड़ेगा। तीनों निगमों के अलावा लोक निर्माण विभाग का भी दावा है कि नालों से गाद निकालने का काम शत-प्रतिशत पूरा है, लेकिन दावों के साथ विभागों की तरफ से दूसरे विभागों पर लापरवाही किए जाने के आरोप भी लगने लगे हैं। 60 फुट से कम चौड़ाई की सड़कों के साथ लगते हुए नालों की सफाई का जिम्मा एमसीडी के पास है।

रेलवे अंडरब्रिज, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई विभाग की ओर से भी नालों से गंदगी निकालने का काम ठीक तरह नहीं किया गया, जबकि पीडब्ल्यूडी की ओर से की गई सफाई के बावजूद निचले हिस्से में जलभराव का खतरा बरकरार है। बारिश के कारण कई जगह जलभराव की वजह से सड़कों पर घंटों वाहनों के जाम की स्थिति से जूझना पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

नहीं हुई है नालों की सफाई 

एमसीडी के अलावा अन्य विभागों की अनदेखी के कारण करावल नगर, पटपड़गंज, तिगड़ी और डेसू कॉलोनी सागरपुर, महावीर एंक्लेव, खजूरी, पटपड़गंज, मधु विहार, उत्तम नगर, सीतापुरी, नरेला सहित कई जगहों पर नालों की सफाई काम पूरा नहीं हो सका है। इन जगहों पर गाद निकालने के बाद एक बार फिर गंदगी इकट्ठा होने की वजह से नालों के जाम होने के कारण सड़कों पर जलभराव की स्थिति एक बार फिर होने का खतरा बरकरार है।

हर साल होते हैं दावे
करावल नगर निवासी संदीप के मुताबिक, हर साल नालों में गंदगी होने की वजह से जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। इस बार भी नालों की सफाई के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन बारिश में सच्चाई सामने आ जाएगी। महावीर एंक्लेव निवासी संजीव का कहना है कि हर साल ऐसे ही दावे किए जाते हैं, जबकि धरातल जलमग्न हो जाता है। खजूरी स्थित नाले के बारे में स्थानीय निवासी हरप्रीत ने बताया कि मानसून में इस बार भी जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा।

50 से अधिक जगहों पर जलभराव का खतरा
पिछले साल मानसून के दौरान 157 जगहों पर जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हुई थी। विभागों का दावा है कि इन्हें दूर कर लिया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि पूरे साल नालों में मलबा और गाद इकट्ठा होने के बाद इन्हें इतनी जल्दी साफ नहीं किया जा सकता है। कई नाले अभी भी ढके हुए हैं, जिन्हें साफ करना तो दूर पानी की निकासी के लिए माकूल इंतजाम नहीं है। बारिश से पहले भी कई सड़कों पर सीवर के मेनहोल के ओवरफ्लो होने की वजह से सड़कों पर गंदे पानी की समस्याएं होती रही हैं। मानसून के दौरान सिविक सेंटर, मिंटो रोड, धौला कुआं समेत 50 से अधिक जगहों पर जलभराव की स्थिति पैदा होने का खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें