केरल से मिली दो शास्त्रीय नृत्य विधाओं में से एक मोहिनीअट्टम की कला को जीवंत रखने वाले गुरु पद्मश्री भारती शिवाजी एवं उनके शिष्यों ने रविवार को मोहिनीअट्टम की मनमोहक प्रस्तुति दी।
केरल त्रासदी से प्रभावित लोगों के लिए ट्रिब्यूट देने के उद्देश्य से सेंटर फॉर मोहिनीअट्टम एवं इंडिया इंटरनेशनल सेंटर द्वारा केरल स्मृति शीर्षक से आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सांसद बलबीर सिंह और प्रख्यात नृत्यांगना यामिनी कृष्णमूर्ति बतौर प्रमुख अतिथि उपस्थित थे।
मंच पर खूबसूरत मोहिनीअट्टम की प्रस्तुति देती गुरु-शिष्या का शानदार नजारा और भाव-विभोर करता प्रदर्शन देखते ही बनता था। गणपति स्तुति से शुरुआत करते हुए मुखाचलम, पारम्परिक सोपान संगीत, जयदेव कृत गीत-गोविंद का मंचन देखने को मिला।
सभी दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का अभिवादन किया। इस दौरान गुरु भारती शिवाजी ने कहा बतौर कलाकार यह हमारा स्वाभाविक प्रयास है, क्योंकि मोहिनियट्टम की सुंदर शैली दुनिया के लिए केरल का उपहार है और अपनी एकजुटता व समर्थन व्यक्त करने के कला के प्रदर्शन से बेहतर विकल्प नहीं है।