साहब, गरीब की कोई औकात नहीं होती। जहां हम काम करते हैं, वहां बहुत बुरा हाल है। अपने बच्चों को पालने के लिए मैं और मेरा भाई यहां नौकरी करते हैं। साहब, मेरे भाई को बचा लो। उसकी हालत बहुत खराब है। वह कमरे में सबसे आगे ही सो रहा था। मैं और मेरा भाई तीसरी मंजिल के कमरे में थे, छह दोस्त भी थे, लेकिन सब मर गए साहब...। हम वहां टोपी बनाने का काम करते थे। पूरे कमरे में जब धुआं आया तो कमरा खोलकर भाग रहा था, लेकिन बाहर लोहे का जाल लगा था, नीचे की मंजिल से आग की लपटें एकदम से ऊपर जाल से बाहर आ गईं और मेरा भाई जल गया।
कल शनिवार था। रविवार को सबकी छुट्टी रहती है तो सब लोग शनिवार को आराम से सोते हैं। कल भी ऐसा ही हुआ था। तड़के 3 बजे ही सोए थे लेकिन कुछ समय बाद जब मेरा दम घुटने लगा तो आंख खुल गई। कुछ समझ पाता उससे पहले ही दरवाजे के नीचे से आग दिखाई देने लगी। मैंने सबको उठाया। आग लगने का पता चला तो सबसे आगे सो रहा भाई मुकीन हड़बड़ा कर उठा और दरवाजा खोला ही था कि जाल से आग उसके ऊपर आ गई और वह लपटों में घिर गया। मुकीन को बचाने के लिए सब दौड़े। हमारे पास जो कंबल था वो उसके ऊपर डाल दिया, लेकिन वह बहुत जल गया था। हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, चिल्लाए भी..। कमरे के आखिर में एक खिड़की थी, उसे खोलकर बाहर झांके ही थे कि उस तरफ से भी आग की लपटें ऊपर आने लगी।
इस बीच मेरे तीन दोस्त आग की चपेट में आ गए और मेरे सामने ही दम तोड़ दिया। बाकी तीन लोग कुछ देर बाद बेहोश हो गए थे। मेरा भाई कराह रहा था और मैं खिड़की से चिल्ला रहा था। मदद मांग रहा था, लेकिन कोई नहीं आया। फिर जब आंख खुली तो लोकनायक अस्पताल में था। यहां बहुत देर मैं इधर-उधर भटकता रहा। बड़ी मुश्किल में मुकीन का पता चला। वो वार्ड 20 में भर्ती है। डॉक्टर कह रहे हैं 55 फीसदी जला है। पता नहीं क्या होगा साहब..। कुछ देर बाद जब मुझे दोस्तों का ख्याल आया तो पूछताछ में पता चला कि बाकी तीनों भी मर गए। उनमें से एक बेगूसराय का रहने वाला था। मौसीन का निकाह इसी साल हुआ था।