मोदी शुगर मिल को किसानों का गन्ना भुगतान लटकाना महंगा पड़ा। इसी कारण गन्ना आयुक्त ने मोदी शुगर मिल के 13 गन्ना क्रय केंद्रों को अन्य मिलों को आवंटित कर दिया है।
13 क्रय केंद्र कटने से मोदी शुगर मिल का करीब दो हजार हेक्टेयर रकबा और 69 लाख क्विंटल गन्ना कम हो गया है। दो वर्ष पूर्व मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल बंद होने के कारण इसका अधिकांश रकबा भी मोदी शुगर को आवंटित था।
इसी कारण मोदी शुगर मिल प्रदेश में सबसे बाद में पेराई सत्र समाप्त करती थी। मगर लगातार आवंटित रकबा (गन्ना क्षेत्रफल) कम होने के कारण इस साल मिल के अप्रैल माह में बंद होने के आसार बन गए हैं।
गन्ना विकास समिति मोदीनगर के पूर्व डायरेक्टर सतपाल तेवतिया, तेजवीर सिंह व कृष्णपाल का कहना है कि एक समय मोदी शुगर मिल की भुगतान के मामले में प्रदेश में सबसे अच्छी स्थिति थी, मगर अब भुगतान को लेकर किसान काफी परेशान हैं।
इसी कारण शासन को मजबूरी में यह निर्णय लेना पड़ा है। वहीं, मिल के लाइजनिंग मैनेजर कपिल आनंद का कहना है कि शासन के इस निर्णय से मिल को काफी परेशानी उठानी पड़ेगी।
पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रही मिल की आर्थिक स्थिति और दयनीय हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे गन्ना आयुक्त से पुन: विचार करने का आग्रह करेंगे।
ये सेंटर किए दूसरी मिलों को आवंटित
गन्ना आयुक्त ने मोदी शुगर मिल के भिक्कनपुर, फजलगढ़, जटपुरा, खैरपुर, ईशापुर व किल्होड़ा क्रय केंद्रों को सिंभावली शुगर मिल को आवंटित किया है। वहीं किठौर, सरावा, हमीरपुर नंगोला को नंगलामल मेरठ को तथा भनैड़ा, काकड़ा, पूठरी, जलालाबाद को मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल मेरठ को आवंटित किया गया है। दूसरी ओर झलावा, ज्ञासपुर व उजैड़ा क्रय केंद्र किनौनी शुगर मिल और उजैड़ा थर्ड दौराला शुगर मिल को आवंटित किया गया है।
दो साल में कटे 25 क्रय केंद्र
बीते दो सालों में मोदी शुगर के 25 गन्ना क्रय केंद्रों को दूसरी शुगर मिलों को आवंटित किया जा चुका है। गत वर्ष भी मोदी शुगर मिल के 12 गन्ना केंद्र अन्य शुगर मिलों को आवंटित कर दिए गए थे।