मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ मिर्जापुर गांव में हुई किसानों की महापंचायत में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा किसानों से किए वादे झूठे निकले।
उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने वहां किसानों की सहूलियत के लिए कपास के 14 खरीद केंद्र लगाए थे। कपास का खरीद मूल्य 1400 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया था लेकिन मोदी सरकार ने मूल्य घटाकर 850 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया।
भट्टा-पारसौल गांव के नजदीक मिर्जापुर में भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस की ये तीसरी महापंचायत थी। किसान मजदूर जागृति महापंचायत का आयोजन उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया गया। इस मौके पर मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर के कई गांवों के हजारों किसान शामिल हुए। किसानों को संबोधित करते हुए मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि गुजरात में हुई साजिश को अब पूरे देश में नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि वे गुजरात से हैं उन्होंने बहुत नजदीक से देखा है कि किस तरह नरेंद्र मोदी ने सुनियोजित विकास के नाम पर गुजरात में लाखों किसानों की जमीन कौड़ियों के भाव चंद पूंजीपतियों को सौंप दी।
अब इस अध्यादेश के माध्यम से पूरे देश में साजिश करने की तैयारी है। किसानों को कांग्रेस के साथ मिलकर अपनी जमीन और कुदरती संसाधनों को पूंजीपतियों के हाथों में जाने से बचाना होगा। मिस्त्री ने कहा कि भट्टा पारसौल कांड में पुलिस और किसानों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। इसके बाद कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के प्रयास करने पर भू अधिग्रहण कानून 2013 को किसान हित के लिए पारित किया था।
भट्टा-पारसौल से संसद के लिए करेंगे कूच
इस मौके पर धीरेंद्र सिंह ने कहा कि जल्द ही एक विशाल जनसैलाव के साथ भट्टा पारसौल से संसद के लिए किसान कूच करेंग, जिससे मोदी सरकार द्वारा लाया गया काला अध्यादेश वापस हो सके। महापंचायत को लोकदल के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, राष्ट्रीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष चौधरी इकपाल सिंह सिवाच, किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष चौधरी अमरपाल सिंह ने भी संबोधित किया।
20 नेता बनाम 120 करोड़ लोग
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष निर्मल खत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अब 20 नेताओं द्वारा बनाए गए इस अध्यादेश के खिलाफ 120 करोड़ लोग आंदोलन करेंगे। ये नेता पूंजीवादी सोच रखते हैं और ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह देश में शासन चलाना चाहते हैं। उनके मंसूबों को नेस्तनाबूद करना है।