सिंघु बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन
- फोटो : जी पाल
केंद्र सरकार ने दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों कृषि कानून में संशोधन के लिए लिखित प्रस्ताव भेज दिया है। किसानों ने जानकारी दी है कि उन्हें 19 पन्नों का लिखित प्रस्ताव सरकार की तरफ से मिला है। इसमें एमएसपी से लेकर बिजली कानूनों तक के बारे में किसानोंं के तमाम मुद्दों का समाधान देने की कोशिश सरकार की तरफ से की गई है।
हालांकि किसानों ने इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि सरकार ने प्रस्ताव में कहीं नहीं लिखा है कि कृषि कानूनों की वापसी होगी। इस प्रस्ताव में सबसे पहले यही लिखा है कि किसानों को जिन मुद्दों पर आपत्ति है उन पर विचार-विमर्श के लिए सरकार खुले दिल से तैयार है।
सरकार ने भेजे ये प्रस्ताव
सरकार ने किसानों के एमएसपी कानून लाने की मांग तो नहीं मानी है लेकिन एमएसपी का लिखित आश्वासन देने की बात प्रस्ताव में कही है।
राज्य सरकार चाहे तो प्राइवेट मंडियों पर भी शुल्क/फीस लगा सकती है।
राज्य सरकार चाहे तो मंडी व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर सकती है।
किसानों अदालत जाने का भी विकल्प दिया जाएगा।
किसान और व्यापारी के बीच कॉन्ट्रैक्ट की 30 दिन के भीतर रजिस्ट्री होगी।
किसान की जमीन गिरवी नहीं रखी जा सकेगी।
बिजली बिल अभी ड्राफ्ट है पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी।
किसान की जमीन की कुर्की नहीं की जा सकेगी।
पराली कानून पर भी ध्यान दिया जाएगा।