पांच सौ और हजार का नोट बंद किये जाने से मेवात जैसे अशिक्षित इलाके के लोगों को भारी परेशानी हो रही है। मेवात इलाका जहां 90 फीसदी किसान हैं ऐसे में किसानों कि खेतों कि बिजाई और सिंचाई का काम जोरो पर है वहीं शादियों का सीजन होने और जेब में पैसा न होने कि वजह से लोग भारी मुसीबत में फंस गये हैं।
इतनी परेशानी होने के बावजूद भी लोग मोदी के फैंसले का तो स्वागत कर रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान कराने की भी मांग कर रहें। किसानों से पांच सौ और हजार का नोट ने तो खाद-बीज विक्रेता ले रहें और ने ही दुकानदार।
वहीं शादियों में बेटे और बंटियों के लिये जेवर घढाना भी नई परेशानी खडी हो गई हैं क्योंकि सुनारों उधार देना और पांच सौ व हजार के नोट लेने से इंकार कर दिया है, जिसकी वजह से लोगों कि शादियों में चडचन पैदा हो गई है।
अखलाक का कहना है कि उसकी बहन कि बृहस्पतिवार को शादी है, उसे 50 हजार रूपये कि सत जरूरत है। वह पिनगवां कि स्टेट बैंक आया है, उसने जमा तो कराये 50 हजार लेकिन बदले में दिये केवल 4 हजार रूपये दिये हैं। ऐसे में वह शादी कैसे करेगा। किसी के पास नये रूपये भी नहीं हैं जो उधार लेकर काम चला सकें।
वहीं ऐसी ही परेशानी में फंसे गांव झिमरावट निवासी सफी मोहमद का कहना है कि उसके परिवार में 14 नवंबर कि शादी है बाजार में कोई पांच सौ और हजार के नोट लेता नही और बैंक चार हजार से फालतू पैसे देती नहीं अब वे क्या करें। पुराने नोटों में सुनार और दुकानदार सामान नहीं दे रहे हैं।
वहीं गंगवानी निवासी किसान इब्राहीम, किसान असलम और किसान सुनील का कहना है कि अगर दस पांच दिन में उनके खेतों कि बिजाई और सिंचाई नहीं हो पाई तो वे तो बरबाद हो जाऐगें। यह उनकी खेती का सीजन है। सरकार को इसका कोई विकल्प खोजना चाहिये जिससे किसानो को परेशानी न हो।
बिना पैसे के दुकानदार उनको खाद-बीज नहीं दे रहे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वे बरबाद हो जाऐगें। खाद-बीज विक्रेता दिनेश कुमार का कहना है कि वे नये नोटों या फिर 100 से कम के नोटों के बदले खाद-बीज दे सकते हैं।
सरकार के इस फैंसले से दुकानदार और ग्राहक बेहद परेशान है। दुकानदार मुकेश दुकानदार का कहना है कि सूबेह से अभी तक उनकी बोहनी तक नहीं हुई है। ग्राहक के पास पांच से कम का नोट नहीं हैं। ग्रामीण असलम, असरूदीन का कहना है कि घर में चाय पत्ति, दूध के लिये कोई पांच सौ का नोट नहीं लेता औा घर में खुले पैसे हैं नहीं तो अब वे क्या करें।
सुनार हरीओम, सतपाल का कहना है कि जब सरकार ने आठ नवंबर कि रात्री पांच सौं और हजार का नोट बंद कर दिया तो वे क्यों लेवे, या तो सरकार पैट्रोल पंपों कि तर उनको भी इजाजत देती तो वे ले सकते थे लेकिन अब वे नहीं ले सकते। उन्होने कहा कि इससे जहां शादी-विवाह करने वाले लोग परेशान हैं हीं उनका भी धंधा बंद हो गया है।