वैसे तो हर चुनाव में राजधानी की राजनीतिक बिसात पूर्वांचली व अनधिकृत कॉलानी वासियों से वायदों पर बिछती है, लेकिन इस बार महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार आदि मुद्दों में इसे राजनीतिक दल प्रमुखता से नहीं उठा पाए।
इसका फायदा उठाया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले व पूर्वांचली मतदाताओं के सहारे नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के करीब 40-45 फीसदी वोटरों को रिझाने का दांव चला।
दरअसल, भाजपा ने इस बार पूर्वांचल के तीन नेताओं को ही टिकट दिया है। पूर्वांचलियों को खुश करने को लेकर भी यह मोदी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पिछले चुनाव में इनमें से अधिकांश सीटें आप के खाते में जाने के बाद रणनीतिकारों ने पूर्वांचलियों व अनधिकृत कॉलोनी वासियों को मोदी के जरिए रिझाने की सोची।
‘मैं पूर्वांचल का हूं'
दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं की संख्या करीब 35 लाख के आसपास बताई जाती है, जोकि करीब 28 सीटों पर निर्णायक स्थिति में हैं।
पूर्वांचली कार्ड खेलते हुए मोदी ने रविवार को द्वारका में आयोजित रैली में कहा कि ‘मैं पूर्वांचल का हूं। पूर्वांचल के लोगों ने मुझे आशीर्वाद दिया। जबकि तय नहीं था कि मैं लोकसभा चुनाव कहां से लडूंगा। भारत में संतुलित विकास चाहिए, पश्चिमी क्षेत्र का विकास हो जाए और पूर्वांचल का नहीं, इससे काम नहीं चलने वाला।’
वैसे तो दिल्ली में पूर्वांचल की अधिकांश आबादी अनधिकृत कॉलोनियों में रहती है, लेकिन कॉस्मोपोलिटन कल्चर के चलते दिल्ली के अधिकांश इलाकों में खासकर पूर्वी, उत्तर पूर्वी व पश्चिमी दिल्ली इलाकों में पूर्वांचली वोटर खासी तादात में मौजूद हैं।
आप के वोटबैंक पर सेंध लगाने की कोशिश
अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत करने तक ही न रुकने की बात कहकर मोदी ने दोनों को मिलाकर 70 में से करीब 34 सीटों पर अपना परचम फहराने की कोशिश की है।
अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर मोदी ने कहा कि इन कॉलोनियों के लिए अभी तक राजनीतिक दलों ने अनधिकृत वायदे ही किए हैं। मैं इन कॉलोनियों को अधिकृत करने पर ही रुकने वाला नहीं हूं, वहां पर विकास हो और तमाम सुविधाएं मिले, इस पर काम हो रहा है।
अनधिकृत व पूर्वांचल वोटर जिन सीटों पर निर्णायक स्थिति में हैं, उनमें से अधिकांश पर गत विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी जीते थे। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री ने आप पर पहले की तरह बड़े हमले से बचते हुए उसके वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है।
...और भाषण के बीच निकले लोग
पूर्वांचलवासियों का इन सीटों पर है प्रभाव
पटपड़गंज, तुगलकाबाद, सीमापुरी, किराड़ी, बादली, कोंडली, विकासपुरी, बुराड़ी, उत्तम नगर, लक्ष्मी नगर, करावल नगर, बादली, सुल्तानपुर माजरा, शकूर बस्ती, देवली, मटियाला, ओखला, सीलमपुर, बदरपुर, संगम विहार, रिठाला, जहांगीरपुरी, पालम, मोतीनगर, अंबेडकरनगर, मुस्तफाबाद, गोकलपुर, त्रिलोकपुरी, नरेला, देवली, शहादरा आदि।
रैली की झलकियां:
रैली के बाद कटआउट के साथ मोदी-मोदी
जैसे ही द्वारका के डीडीए ग्राउंड पर मोदी की रैली खत्म हुई लोग मैदान में लगे नरेन्द्र मोदी के बड़े-बड़े कटआउट उतार कर अपने साथ ले जाने लगे। दो-दो आदमी कटआउट को पकड़ कर चल रहे थे और साथ चल रहे लोग मोदी-मोदी के नारे लगा रहे थे। ग्राउंड के चारों ओर बने मकान की छत पर भी लोग मोदी को देखने और उनके भाषण सुनने के लिए खड़े थे।
...और भाषण के बीच निकले लोग
प्रधानमंत्री के भाषण बीच ही लोग ग्राउंड से जाते नजर आए। लोग यह कहते हुए निकल रहे थे कि भाषण खत्म होने के बाद एक साथ सब लोग निकलेंगे तो भीड़ हो जाएगी। लिहाजा लोग से भीड़ से बचने के लिए भाषण के बीच ही अपने-अपने घर के लिए निकलने लगे।
पानी तो पानीपत ही रह गया?
जब मोदी मंच से बोल रहे थे कि केन्द्र में और हरियाणा में भाजपा की सरकार आई तब दिल्ली को पानी मिलने लगा। मोदी ने सवालिया लहजे में पूछा कि पानी मिला कि नहीं, तब भाषण सुन रहे एक व्यक्ति ने कहा कि पानी तो पानीपत ही रह गया, पानी तो टोटी में आया ही नहीं।