फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपदा को अवसर में बदल महिलाओं को सिखाया कौशल, कोरोना काल में जब रोटी के पड़े लाले तो लता-सुनीता लेकर आई आत्मनिर्भरता के निवाले

Fri, 25 Dec 2020 07:47 AM IST
Vikas Kumar संदीप पाराशर, अमर उजाला, बल्लभगढ़
विज्ञापन
बच्चे आर्ट एंड क्राफ्ट का काम सीखते हुए - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

कोरोना संक्रमण काल के दौरान आपदा को अवसर में बदलकर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और उन्हें दो जून की रोटी उपलब्ध कराना आसान बात नहीं है। इसके बावजूद कुछ महिलाएं ऐसी हैं जोकि हमेशा ही नारी सशक्तिकरण के लिए प्रयास करती रहती हैं। मिशन जागृति से जुड़ी महिला सुनीता गर्ग और लता सिंगला ने भी कोरोना संक्रमण काल के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी महिलाओं को अपने दम पर आत्मनिर्भरता का निवाला हासिल करने योग्य बनाया। लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुईं महिलाओं को सिलाई, बुनाई, कढ़ाई व अन्य माध्यम से खुद के पैरों पर खड़ा किया।

विज्ञापन


बल्लभगढ़ की तिरखा कॉलोनी में रहने वाली मिशन जागृति संस्था की वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनीता गर्ग कोरोना काल के बाद से ही आत्मनिर्भर केंद्र चला रही हैं। इस केंद्र में करीब 88 महिलाएं सिलाई, मेहंदी, चित्रकला व योग आदि की कला सीखकर अपने आपको स्वावलंबी बना रही हैं। जहां इनकी मदद समाज सेविका लता सिंगला भी कर रही हैं। जो चित्रकला के साथ साथ मेहंदी व योग में महिलाओं को निपुण कर रही हैं। इस केंद्र में जरूरतमंद महिलाओं को संस्था की तरफ से समय-समय पर निशुल्क सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। जो महिलाएं कार्य पर पकड़ बनाती जा रही हैं, उनको उनके कार्य का मेहनताना भी दिया जाता है।

संस्था द्वारा समय-समय पर महिलाओं की जागरूकता संबंधित कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। संस्था का उद्देश्य महिलाओं को स्वावलंबी बनाना है। इसके लिए हमेशा ही प्रयास करती रहती हूं। बेहतर कार्य करने वाली महिलाओं को संस्था निशुल्क सिलाई मशीन भी उपलब्ध कराती है।  - सुनीता गर्ग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मिशन जागृति संस्था   
विज्ञापन


देते हैं मुफ्त सामग्री
संस्था की तरफ से महिलाओं को चित्रकला एवं योग का ज्ञान भी दिया जाता है। अगर किसी महिला के पास चित्रकला व मेहंदी सीखने के लिए सामग्री नहीं होती है, तो वह भी हम अपनी तरफ से उपलब्ध कराते हैं। हमारा अधिक से अधिक उद्देश्य महिला को आत्मनिर्भर बनाना है। - लता सिंगला अध्यापक (आर्ट एंड क्राफ्ट) 

सेक्टर-2 में बने एक खाली प्लॉट में अपने परिवार के साथ रहती हूं। जहां मुझे पता चला कि तिरखा कॉलोनी में मुफ्त में सिलाई सिखाई जाती है और मैं वहां से यहां सिलाई सीखने के लिए आती हूं। अब मुझे आत्मनिर्भर बनना है। -स्वाति, छात्रा 

कम पैसों में कमाया जा सकता है अधिक मुनाफा 
एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते नौकरी छूट गई। एक शिक्षक होने के नाते मैंने हिम्मत नहीं हारी और मैं कुछ करने का प्रयास करने लगी। सिलाई का परीक्षण लेना शुरू किया। अभी मैं पूरी तरह से सीख नहीं पाई हूं, लेकिन मास्क और अन्य चीजें मैं बनाने लगी हूं। अब मुझे भरोसा हो गया है कि कम पैसे में काम शुरू कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। - संगम कौशिक, निवासी तिरखा कॉलोनी 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें