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दिल्ली से घूमने गया था शिमला, लापता हुआ युवक, छह दिनों तक ऐसे लड़ी जिंदगी की जंग

Tue, 26 Mar 2019 10:14 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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छात्र हिमांशु - फोटो : हिंदुस्तान टाइम्स
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दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ने वाला युवक अपने दोस्तों के साथ हिमाचल के मैक्लॉडगंज के पास त्रिउंड ट्रेकिंग के लिए गया था। इस दौरान वह अपने दोस्तों से बिछड़ गया। रेस्क्यू टीम ने उसे सोमवार को ढूंढ निकाला। छह दिनों तक अपने दोस्तों से अलग होकर जंगली इलाके में अपनी जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष किया। उसके पास खाने-पीने का सामान भी नहीं था।

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हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, उसकी तलाश में स्थानीय ट्रेकर पिछले एक सप्ताह से खोज अभियान चला रहे थे और सोमवार को उन्हें सफलता मिली। डीआईजी संतोष पटियाल ने इस खोजी अभियान के बारे में बताते हुए कहा कि, 20 वर्षीय हिमांशु आहूजा को जब हमने पाया तो वह त्रिउंड पहाड़ी के ठीक नीचे थे। उनके बायां पांव टूटा हुआ था। हिमांशु दिल्ली के महाराजा अग्रसेन कॉलेज की तरफ से आए 40 छात्र व फैकल्टी के समूह का हिस्सा थे, जो अपनी टीम से बिछड़ गए थे।

डीआईजी ने जानकारी दी कि हिमांशु के ग्रुप ने 19 मार्च को ट्रेकिंग शुरू की थी। वापस लौटते वक्त वह पीछे रह गया और रास्ता भटक गया। जब उसका ग्रुप मैक्लॉडगंज लौटा तो उन्होंने पाया कि हिमांशु उनके साथ नहीं था जिसके बाद उन्होंने उसकी गुमशुदगी की शिकायत कराई। हिमांशु को ढूंढने के लिए पुलिस ने आर्मी और खोजी कुत्तों की मदद ली।

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झरने का पानी पीकर बचाई जान

हिमांशु ने मीडिया से बातचीत में अपनी आपबीती बताई। हिमांशु बोला कि उसकी दोस्तों के साथ कुछ बहस हो गई थी और वह ग्रुप के पीछे-पीछे चल रहा था। वह ग्रुप की स्पीड के साथ नहीं चल सका और पीछे रह गया। उसने लोगों के पैरों के निशान को फॉलो करने की कोशिश की, लेकिन वह फिसल गया और उसके पांव में चोट आ गई और झरने के पास फंस गया।

हिमांशु ने बताया कि उसने अपने दोस्तों को फोन करने की कोशिश की लेकिन मोबाइल की बैट्री ही खत्म हो गई। उसका पैर सूज गया था और तेज दर्द के चलते वह अपनी जगह से हिल भी नहीं पा रहा था। उसके पास खाने को कुछ भी नहीं था, क्योंकि जो भी बिस्किट या अन्य चीज उसके पास थी वह पहले ही दिन खत्म हो गई। इतने दिनों तक वह सिर्फ झरने का पानी पीकर जिंदगी से लड़ता रहा और आशा करता रहा कि कोई उसे ढूंढते हुए आएगा।

बचाव टीम के एक सदस्य महेंद्र बिहान ने बताया कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि हिमांशु इतनी मुश्किल परिस्थिति में भी बच गया। जहां वह फंसा था वहां जंगली जानवरों का भी डर रहता है और शाम होते ही वहां का तापमान भी बहुत कम हो जाता है। ऐसे में बिना किसी उपयुक्त खाने व रहने के सामान के हिमांशु का जिंदा बचना सच में चमत्कार है।
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