Miscreants demands to engineer
आरोपियों ने पिस्टल की नोंक पर पीड़ित से नोटों से भरा बैग भी ले लिया था। आरोपी जब भागने लगे तभी पुलिस ने दो आरोपियों लाल कुंआ, पुल प्रह्लादपुर निवासी सचिन और सोनू को पकड़ लिया। इनके कब्जे से पीड़ित से लिया पैसा, हथियार, कारतूस व वारदात में इस्तेमाल होने वाला मोबाइल बरामद किया गया।
आरोपियों ने बताया कि वह कम समय में अधिक पैसा कमाना चाहते थे। उन्होंने मुकेश व सहदेव के साथ मिलकर पैसे ऐंठने की साजिश रची थी। सहदेव इंजीनियर के यहां ड्राइवर की नौकरी करता था। उसी ने सचिन व अन्य को सूचना दी थी। पुलिस ने बाद में सहदेव व मुकेश को गिरफ्तार कर लिया।
सचिन है गिरोह का सरगना
सहदेव के सूचना देने के बाद सचिन ने पूरी वारदात की साजिश रची थी। उसे इंटरनेट की अपनी उम्र से ज्यादा जानकारी है। ये पीड़ित को इंटरनेट कॉल (वीओआईपी के जरिए) करते थे। ये फर्जी आईडी से नया ई-मेल बनाते थे। इसके बाद ये पीड़ित को कॉल करते थे। इस तरह इन्होंने कई ई-मेल आईडी बनाए थे। इंटरनेट में ये सिस्टम है कि अगर नया ई-मेल आईडी बनाते हैं तो कुछ समय के लिए उस ई-मेल पर फ्री इंटरनेट कॉल मिलती हैं। आरोपी उसी का फायदा उठाते थे।
छात्र नेता बनना चाहता था सचिन
सचिन (19) को इंटरनेट की काफी जानकारी है। वह रंगदारी के पैसे से अच्छे कॉलेज में दाखिला लेता और फिर छात्र नेता के चुनाव लड़ता। सोनू (22) बाइक मैकेनिक की दुकान पर हेल्पर की नौकरी करता था। मुकेश (27) पेशे से ड्राइवर है। सहदेव (23) पीड़ित इंजीनियर का ड्राइवर है। आरोपी पहली आपराधिक वारदात को अंजाम देने निकले थे।