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ऐप की मदद से इंजीनियर से मांग रहे थे 1.8 करोड़ रुपए, पुलिस ने ऐसे कर लिया अरेस्ट

Fri, 29 Jun 2018 09:39 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली
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Miscreants demands to engineer
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दक्षिण जिला पुलिस ने चार ऐसे युवकों को गिरफ्तार किया है जो इंटरनेट का इस्तेमाल कर एमसीडी के सहायक इंजीनियर से 1.8 करोड़ रुपये ऐंठना चाहता थे। आरोपियों ने डराने के लिए इंजीनियर के बेटे के अपहरण कर प्रयास भी किया। बेटे से कहा कि दिखाना चाहते हैं कि वह अपहरण भी कर सकते हैं।

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आरोपी रंगदारी के लिए ऐप का इस्तेमाल कर अमेरिका व कनाडा के नंबरों से फोन कर रहे थे। आरोपियों ने पीड़ित को फोन करते समय खुद को राजेश भारती उर्फ क्रांति गिरोह का सदस्य बताया था। हालांकि इनका राजेश भारती गिरोह से कोई संबंध नहीं है।
  
दक्षिण जिला डीसीपी रोमिल बानिया ने बताया कि सफदरजंग एन्क्लेव में रहने वाले एमसीडी के सहायक इंजीनियर मनोहर ने पुलिस को शिकायत दी थी कि यूएस व कनाडा के मोबाइल नंबरों से फोन कर कोई व्यक्ति 1.8 करोड़ रुपये मांग रहा है। किसी ने 13 जून को सूरजकुंड, फरीदाबाद से लौटते समय उसके बेटे का गन पाइंट पर अपहरण करने का प्रयास भी किया था।
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आरोपी धमकी देकर गए थे कि अगर वह चाहते तो अपहरण कर सकते थे। इस बाबत सूरजकुंड थाने में मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों को पकड़ने के लिए स्पेशल स्टाफ प्रभारी गोविंद चौहान व महरौली थानाध्यक्ष अतुल कुमार की देखरेख में विशेष टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने बड़खल चौक पर रंगदारी की रकम देने के बहाने से आरोपियों को बुलाया। बाइक पर दो युवक पीड़ित से नकदी लेने आए।

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छात्र नेता बनना चाहता था सचिन

Miscreants demands to engineer
आरोपियों ने पिस्टल की नोंक पर पीड़ित से नोटों से भरा बैग भी ले लिया था। आरोपी जब भागने लगे तभी पुलिस ने दो आरोपियों लाल कुंआ, पुल प्रह्लादपुर निवासी सचिन और सोनू को पकड़ लिया। इनके कब्जे से पीड़ित से लिया पैसा, हथियार, कारतूस व वारदात में इस्तेमाल होने वाला मोबाइल बरामद किया गया।

आरोपियों ने बताया कि वह कम समय में अधिक पैसा कमाना चाहते थे। उन्होंने मुकेश व सहदेव के साथ मिलकर पैसे ऐंठने की साजिश रची थी। सहदेव इंजीनियर के यहां ड्राइवर की नौकरी करता था। उसी ने सचिन व अन्य को सूचना दी थी। पुलिस ने बाद में सहदेव व मुकेश को गिरफ्तार कर लिया।  

सचिन है गिरोह का सरगना
सहदेव के सूचना देने के बाद सचिन ने पूरी वारदात की साजिश रची थी। उसे इंटरनेट की अपनी उम्र से ज्यादा जानकारी है। ये पीड़ित को इंटरनेट कॉल (वीओआईपी के जरिए) करते थे। ये फर्जी आईडी से नया ई-मेल बनाते थे। इसके बाद ये पीड़ित को कॉल करते थे। इस तरह इन्होंने कई ई-मेल आईडी बनाए थे। इंटरनेट में ये सिस्टम है कि अगर नया ई-मेल आईडी बनाते हैं तो कुछ समय के लिए उस ई-मेल पर फ्री इंटरनेट कॉल मिलती हैं। आरोपी उसी का फायदा उठाते थे।  
 
छात्र नेता बनना चाहता था सचिन
सचिन (19) को इंटरनेट की काफी जानकारी है। वह रंगदारी के पैसे से अच्छे कॉलेज में दाखिला लेता और फिर छात्र नेता के चुनाव लड़ता। सोनू (22) बाइक मैकेनिक की दुकान पर हेल्पर की नौकरी करता था। मुकेश (27) पेशे से ड्राइवर है। सहदेव (23) पीड़ित इंजीनियर का ड्राइवर है। आरोपी पहली आपराधिक वारदात को अंजाम देने निकले थे।  
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