छेड़छाड़ के विरोध में छत से फेंकी गई किशोरी को एम्स अस्पताल में दाखिला नहीं मिल सका। किशोरी एक माह से कोमा में है। इसके बाद परिवार घायल युवती को वापस घर ले आया। पीड़ित परिजन न्याय के लिए और एम्स अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराने को लेकर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से भी मिलने पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। अब परिजन उनसे मिलने दिल्ली जाएंगे।
दरअसल, बिहार के समस्तीपुर निवासी करीब दो दशक से नोएडा के मोरना में रह रहा था। परिवार में तीन बेटे और तीन बेटियों के साथ दंपति रहता है। एक माह पहले उनकी बेटी में छत से नीचे गिरकर घायल अवस्था में मिली थी। परिजनों ने सोचा था कि वह रात में गिर गई होगी, लेकिन पास के घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से पता चला कि उसे छेड़छाड़ के विरोध पर नीचे फेंका गया है।
परिजनों ने सेक्टर-24 में पड़ोस के टोनी राघव और रोहित राघव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है, लेकिन अभी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। किशोरी घटना के बाद से कोमा में है और कुछ भी नहीं बता पा रही है। जिला अस्पताल ने दो दिन पहले दिल्ली के लिए रेफर कर दिया था, लेकिन शनिवार को उसे एम्स में भी बेड खाली नहीं होने से भर्ती नहीं किया जा सका।
नौ लाख रुपये हुए खर्च
पीड़ित परिवार का कहना है कि करीब 9 लाख रुपये एक माह में इलाज पर खर्च हो चुके हैं और अधिकतर रकम कर्ज की है। किशोरी पढ़ाई में काफी तेज थी और सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में उसने 94 फीसदी अंक प्राप्त किए थे, लेकिन परिणाम की खुशी न तो वह पा सकी और न ही परिवार को मिली।