ओडिशा की तर्ज पर अब प्रदेश में भी सेटेलाइट की मदद से अवैध खनन रोकने की तैयार की जा रही है। विभाग की ओर से खास सॉफ्टवेयर बनाए जा रहे हैं। करीब पांच-छह माह में लागू हो जाने वाली नई व्यवस्था में खनन के लिए अनुमति लेने वाले गाड़ियों पर जीपीएस से नजर रखी जाएगी। किस स्थान पर कितना खनन हो रहा है इस पर सेटलाइट के जरिये हर पल नजर रखी जाएगी।
नई तकनीक से गौतमबुद्ध नगर में यमुना नदी समेत प्रदेश के हर जिले पर नजर रहेगी। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में भी ओडिशा की तर्ज पर खनन रोकने के लिए ऑनलाइन नजर रखनी की बात रखी है।
जानकारी के मुताबिक यमुना नदी में जिन इलाकों में खनन के लिए शासन द्वारा अनुमति दी जाएगी। उन ठेकेदारों को अपनी प्रत्येक जेसीबी मशीनों और ट्रकों में जीपीएस लगाना अनिवार्य होगा।
विभाग के द्वारा जारी रमन्ना पर ट्रक का नंबर भी अंकित होगा। जिससे ट्रक किस स्थान पर आ जा रहा है उस पर नजर रखी जा सकेगी। अगर अनुमति वाले स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रक की लोकेशन पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। खनन वाले क्षेत्रों पर भी गूगल मैप के जरिये हर पल नजर रखी जाएगी।
तकनीक की जानकारी लेने ओडिशा गई थी टीम
प्रदेश स्तर पर विभाग के अधिकारियों की एक टीम ने पिछले दिनों ओडिशा जाकर सेटेलाइट के जरिये खनन रोकने की व्यवस्था को जाकर देख चुके हैं। टीम के सदस्यों ने इसे कारगर बताया है। साथ ही व्यवस्था को प्रदेश में लागू करने की सिफारिश की है।
टीम की रिपोर्ट के बाद प्रदेश स्तर पर सॉफ्टवेयर तैयार कराने की तैयारियां चल रही है। माना जा रहा है आगामी पांच से छह माह में व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए विभाग की लखनऊ में बैठक हो चुकी है।