प्रधानमंत्री जनआरोग्य परियोजना (आयुष्मान भारत) देश के उन करोड़ों लोगों को भी सुख दे सकती है, जिन्हें संतान न होने के कारण सामाजिक और मानसिक स्तर पर परेशान होना पड़ रहा है। अभी तक करीब 1300 से ज्यादा स्वास्थ्य पैकेज आयुष्मान भारत का हिस्सा हैं, लेकिन आईवीएफ चिकित्सा को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय आगामी बजट में आईवीएफ चिकित्सा पर चर्चा कर पैकेज में शामिल कर सकता है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित होटल हंस में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में नोवा आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. पारुल कटियार का कहना है कि अभी तक सामने आईं रिसर्च के अनुसार देश में हर चौथे परिवार में कोई न कोई बांझपन से जूझ रहा है।
दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में ये स्थिति और भी ज्यादा भयावह है। धूम्रपान, वायु प्रदूषण और असंतुलित जीवनशैली युवाओं को बांझपन का शिकार बना रही है। आईवीएफ पिछले पांच वर्षों में काफी लोगों तक पहुंचा है। इसलिए आयुष्मान भारत सहित तमाम बीमा कंपनियों को भी इसे शामिल करना चाहिए। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को संतान प्राप्ति का सुख मिल सके।
भविष्य बनाने की राह में जो लोग देरी से शादी कर रहे हैं, उन्हें भी इस तकनीक से होकर गुजरना पड़ रहा है। चूंकि राष्ट्रीय स्तर पर अब तक सरकार ने आईवीएफ को लेकर गाइडलाइन नहीं बनाई है, जिसके चलते इस चिकित्सा को लेकर गलत उपचार भी किए जा रहे हैं।
बढ़ सकते हैं आयुष्मान के पैकेज
अभी तक आयुष्मान भारत के तहत 1300 से ज्यादा पैकेज को शामिल किया है। बताया जा रहा है कि अगले माह होने जा रही नेशनल हेल्थ एजेंसी की बैठक में पैकेज को बढ़ाने पर चर्चा होगी। सूत्रों की मानें तो अबकी बार आईवीएफ सहित अन्य कई तरह के रोगों का उपचार भी इस योजना में शामिल किया जा सकता है।