सुल्तानपुर राष्ट्रीय पक्षी उद्यान से साइबेरिया, मंगोलिया और यूरोप से आए परिंदे अब वापसी करने लगे हैं। संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल के पहले सप्ताह तक उद्यान की झील मेहमानों से खाली हो जाएगी। पिछले पांच माह से इन परिंदों की चहचहाहट और अठखेलियों ने हर किसी का दिल जीता। इन्हें निहारने के लिए रोजाना सैकड़ों पक्षी प्रेमी उद्यान पहुंचते रहे। अब मेहमान पक्षी ‘आ अब लौट चले’ मोड पर आ गए हैं।
मार्च के मध्य से ही राष्ट्रीय पक्षी उद्यान से विदेशी परिंदे अपने मूल स्थान की ओर उड़ान भरने लगे हैं। अब रोजाना इनकी संख्या घटती जा रही है। ज्यों-ज्यों मौसम में गर्माहट बढ़ती जा रही है, मेहमानों की वतन वापसी उतना ही जोर पकड़ती जा रही है। उद्यान परिसर में अभी बार हेडेड गूज और ग्रे लेक गूज की अच्छी खासी संख्या है। पक्षी विशेषज्ञ अनिल गंडास का कहना है कि यह वह पक्षी हैं जो सबसे अधिक समय तक यहां रहते हैं। अब झील में करीब 10 हजार पक्षी मौजूद हैं।
राष्ट्रीय पक्षी उद्यान और पक्षी प्रेमियों के लिए यह सर्दी काफी खास रही। इस बार पक्षियों का आगमन भले ही देरी से हुआ मगर जब उनके आने का सिलसिला शुरू हुआ, तब उनके आगमन का एक दशक पुराना रिकॉर्ड भी टूट गया।
इस बार एक लाख से अधिक परिंदों ने उद्यान की झील में अठखेलियां की। ‘ह्वाइट कैप्ड रेडस्टार्ट’ जैसे पक्षी भी इस बार खूब दिखे। अब तक यह सबसे अधिक भूटान, कंबोडिया, दक्षिण पूर्व एशिया, लाओस, म्यामार, नेपाल, तजाकिस्तान, थाईलैंड, तिब्बत और वियनतान में देखे जाते थे। उद्यान की देखरेख कर रहे सुरेश बताते हैं कि सुल्तानपुर झील में 'रूडी ब्रेस्टेड क्रोक’ पक्षी कई वर्षाें के बाद दिखा।
इन पक्षियों ने जीता दिल
ओरियंटल ह्वाइट आई, स्केले थ्रुश, ह्वाइट-रैंप्ड निडलटेल, रेड वैटल्ड लैपविंग, रिवर लैपिंग, यूरेशियन ब्लैक बर्ड, कॉमन बैब्लर, कॉमन टील, ग्रूज, क्रेस्टेड, यूरेशियन स्पैरोहॉक, स्पॉटेड रेडशांक, रोजी पेलिकन, गोडवाल, वुड सैंडपिपर, ब्लैक टेल व एशियन कोयल
हरसरू बना परिंदों का नया अड्डा
हरसरू में सेज के लिए अधिग्रहित जमीन पर स्थिति लाना भी परिंदों का पनाहगार बना। अभी भी वहां करीब पांच हजार परिंदे मौजूद हैं। पूरी सर्दी यह स्थान भी साइबेरियन और यूरोपियन पक्षियों से गुलजार रहा।