सीतामढ़ी, बिहार के गांव रीगा मजोरा के रहने वाले मनोहर का रोजगार भी इस कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन में छिन गया। दैनिक मजदूरी करने वाला मनोहर अपनी पत्नी देवबाला, दो साल की बेटी और दुधमुंहे बच्चे के साथ कोटगांव में किराए पर रहता था।
मनोहर का कहना है कि रोजाना जो कमाते थे, उसी से घर में चूल्हा जलता था। उनके गांव के 10 अन्य लोग आसपास ही रहते हैं और दैनिक मजदूरी करते हैं। मनोहर ने बताया कि अब काम नहीं रहा, जेब में पैसा नहीं बचा तो गाजियाबाद में उनका दिल नहीं लगता।
वह गांव जाने के लिए शनिवार को रामलीला मैदान पहुंचे थे। हालांकि उनके पास प्रशासन की ओर से कोई मैसेज नहीं आया था, लेकिन पंजीकरण कराए जाने की वजह से उन्हें उम्मीद थी कि शायद प्रशासन के अधिकारी उन्हें ट्रेन में बैठने की इजाजत दे दें।