फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेवात डीसी अल्पसंख्यक विरोधी: मेवात विकास सभा

Wed, 08 Feb 2017 03:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
विज्ञापन
- फोटो : social media
विज्ञापन
मेवात उपायुक्त मणिराम शर्मा का मेवात से तबादला कराने और उनको देश के किसी भी अल्पसंयक जिले में ने लगाने कि मांग को लेकर मेवात कि अग्रिम संस्था मेवात विकास सभा के बेनर तले आगामी 9 फरवरी से जिले के सभी पांचों खंडों में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाऐगा। मेवात के पुन्हाना, नगीना, फिरोजपुर झिरका, नूंह और तावडू में दस-दस फीट बेनर पर अलग-अलग खंडो के लोगों के हस्ताक्षर कराये जाऐगें, उसके बाद इलाके के प्रमुख लोग, सामाजिक संस्था, सरंपच, जिला पार्षद नंबरदार आदी के एक शिकायत पर हस्ताक्षकर कराकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केट, राज्यपाल और मुयमंत्री को भेजा जाऐगा। यह जानकारी मेवात विकास सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उमर मोहमद पाडला ने दी।
विज्ञापन


मेवात विकास सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उमर मोहमद पाडला ने बताया कि मेवात उपायुक्त मणिराम शर्मा कि कार्यशैली अल्पसंयकों के खिलाफ है। जबकी एक अधिकारी को सभी समाज के लोगों को साथ लेकर चलना चाहिये और जो सरकार कि योजनाऐं है उनका आम जनता के सहयोग से पूरा करना चाहिये।

पाडला का कहना है कि सीआरपीएफ कैंप के लिये पहले से ही गांव इंडरी पंचायत ने जमीन का प्रस्ताव कर प्रशासन की मार्फत सरकार को भेज रखा था लेकिन डीसी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुऐ गांव टूंडलाका कि जमीन का उस समय बीडीपीओ पुन्हाना से प्रस्ताव ोजा जब पंचायते डिजोल थी। इसी तरह करीब आठ साल पहले गांव सालाहेडी में केंद्रीय विद्यालय बनाने के लिये पंचायत ने प्रस्ताव संगठन को भेज रखा था और जामीन का मुटेशन भी केंद्रीय विद्यालय के नाम चढ चुका था फिर जबरजस्ती डीसी इस स्कूल को जिला मुयालय से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव संगेल में बनाने पर आमादा है।
विज्ञापन


उनका कहना है कि डीसी अल्पसंयक विरोधी ऐसे भी प्रतीत होता है कि गांव डींगरहेडी में डबल मर्डर, डबल गैंग रेप होता है तथा कई को गंभीर रूप से घायल कर दिया जाता है। एक अधिकारी होने के नाते डीसी का फर्ज बनता थी कि पीडित परिवार को सांत्वना देने तुरंत जाते लेकिन डीसी तीन दिन तक गांव में नहीं गया और जब गये तो एक मंत्री के साथ गये। उनका कहना है कि गांव सिंगार में एक सडक हादसे में गांव के ही पांच लोगों की मौत हो गई थी लेकिन डीसी उन परिवारों के दुख दर्द जानने तक नहीं गया।

 सभा के प्रधान का कहना है कि केंद्र और हरियाणा सरकार कि ओर से लोगों को घरों में शौचालय बनाने के लिये 12 हजार रूपये दिये जाते हैं लेकिन डीसी ने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुऐ वह राशी बंद कर दी है और गरीब लोग जिनके पास खाने तक को पैसे नहीं है उनसे जबरजस्ती शौचालय बनवा रहा है अगर कोई बनाने में मजबूर होता है तो उसको बीपीएल का राशन तक ना देने कि धमकी दे रहा है।

उनका आरोप है कि जंगल में शैच करने जाने वाले लोगों के लिये फेसबुक और वटसऐप आदी पर अभद्र भाषा का डीसी इस्तेमाल करता है। अगर कोई पीने का पानी ना आने कि शिकायत करे तो उससे भी अभद्र भाषा में बात करता है। इससे साफ जाहिर है कि यह डीसी अल्पसंक विरोधी है, इसलिये इसका तुरंत दबादला किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें