कोरोना काल में लागू लॉकडाउन का असर मेट्रो सेवाओं पर भी पड़ा है। सेवाएं 169 दिनों तक बंद रहने के बाद दोबारा चरणों में शुरू की जा रही है, लेकिन फेस-4 परियोजना को पूरा होने पर दो-तीन महीने की देरी हो सकती है।
लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों के गृह राज्यों की तरफ रुख करने, आर्थिक नुकसान का फेस-4 पर असर पड़ा है। पिछले साल दिल्ली मेट्रो के प्रस्तावित छह में से तीन कॉरिडोर पर केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद कार्य किए जा रहे हैं। पिछले साल दिसंबर से फेस-4 परियोजना पर कार्य शुरू कर दिए गए।
मेट्रो के प्रबंध निदेशक के मुताबिक इसी बीच कोविड-19संक्रमण के प्रकोप से परियोजना भी प्रभावित हुई है। हालांकि दो-तीन महीने तक स्थगित होने की वजह से लागत पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। डीएमआरसी के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान भी चुनौतियों का सामना करते हुए विशेषज्ञों की टीम ने परियोजना के विस्तार और डिजाइनिंग पर उत्कृष्ट कार्यों का प्रदर्शन किया।
तीन कॉरिडोर पर कार्यों को नई रफ्तार भी मिली। महामारी काल में डीएमआरसी को 1,300 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। श्रमिकों के वापस लौटने पर फेस-4 के तहत 61.679-किलोमीटर नई मेट्रो लाइनों का निर्माण किया जाएगा।
तीनों कॉरिडोर में 45 मेट्रो स्टेशन
मुकुंदपुर-मौजपुर, आर के आश्रम-जनकपुरी पश्चिम और एयरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर पर कार्य लॉकडाउन के दौरान भी किए जा रहे हैं। फेस-4 में पाइलिंग, यू गर्डर्स लगाने सहित कई बुनियादी कार्य शुरू किए जा चुके हैं ताकि परियोजना में होने वाली देरी कम से कम हो। रिठाला-बवाना-नरेला, इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ और लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक पर अभी भी इंतजार है।