फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: जागरूकता के साथ बढ़ रही है मानसिक रोगियों की संख्या

Mon, 10 Oct 2016 09:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
विज्ञापन
विज्ञापन
साइबर सिटी की भागती दौड़ती जिंदगी के बीच काम का दबाव लोगों को मानसिक रोगी बना रहा है। सरकारी अस्पताल से लेकर निजी अस्पताल तक मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है।
विज्ञापन


बीते चार सालों में करीब 30 फीसदी मरीजों में इजाफा हुआ है। मानसिक रोगियों के बढ़ने की वजह से निजी अस्पताल इसके लिए अलग से विभाग स्थापित कर रहे हैं।
सिविल अस्पताल में वर्ष 2012 में 11427 मरीज आए थे। 2014 में यह 13124 मरीज पहुंचे, जबकि 2016 सितंबर में 13500 का आंकड़ा पार कर चुका है।

बीते वर्षों के आंकड़ों से इसमें 30 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है। सिविल अस्पताल के मनोरोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मदीप सिंधु कहते हैं ओपीडी में मरीज बढने का अर्थ कतई नहीं है कि मरीज बढ़ रहे हैं। इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, जिससे मरीज अधिक इलाज के लिए आ रहे हैं।

भागमभाग की जिंदगी के बीच काम का दबाव की वजह से अधिकांश लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। इसके मरीज अधिक बढ़ रहे हैं। कुल ओपीडी में करीब 25 फीसदी मरीज डिप्रेशन के आते हैं। डिप्रेशन की वजह से नशे की लत भी बढ़ रही है।
विज्ञापन


आज की तारीख में 15 फीसदी लोग इसके गिरफ्त में आ रहे हैं। जबकि ऩ्य सिजोफेनिया, साइकोटिक डिस्ऑर्डर, पैनिक डिस्ऑर्डर के मरीजों में भी इजाफा हो रहा है। डॉ. ब्रह्मदीप सिंधु कहते हैं लोगों को पुराने झाड़ फूंक नियम से इतर इलाज की जरूरत महसूस हो रही है। अब लोग इलाज के लिए आ रहे हैं।

पारस अस्पताल के मेंटल हेल्थ एंड विहेवियरल साइंस विभाग की ओर से एक महीने के 800 ओपीडी के विश्लेषण के बाद पाया गया कि इसमें डिप्रेशन के मरीज करीब 50 फीसदी हैं, जबकि चिंता की बीमारी 30 फीसदी है। ओसीडी 10 फीसदी, नशा के आदी 10 फीसदी मरीज पाए गए। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें