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मानसिक रोग बढ़ रहे तेजी से, निमहंस है जरूरी: विशेषज्ञ

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-नियम के अनुसार एक लाख आबादी पर तीन मानसिक रोग विशेषज्ञ होने चाहिए, जबकि कई जिलों में एक भी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने नॉर्थ इंडिया में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बेंगलुरु के निमहंस अस्पताल की तर्ज पर एक आधुनिक मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल बनाने का फैसला किया है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम समय की सबसे बड़ी जरूरत है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, देश में मानसिक तनाव के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन इलाज के लिए जरूरी डॉक्टर और सुविधाएं बहुत कम हैं। नियम के अनुसार, एक लाख आबादी पर तीन मानसिक रोग विशेषज्ञ होने चाहिए, जबकि कई जिलों में एक भी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है। इसका नतीजा यह होता है कि मरीजों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता।


डॉक्टर के अनुसार, मानसिक बीमारी का असर सिर्फ मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। कई बार घर की महिलाएं मरीज की देखभाल के लिए अपनी नौकरी छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। इलाज लंबा और महंगा होता है, जिससे परिवार आर्थिक और मानसिक दबाव में आ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि नॉर्थ इंडिया में अभी ऐसा कोई बड़ा और विशेष मानसिक स्वास्थ्य संस्थान नहीं है, जहां गंभीर मानसिक रोगों और नशे की लत का एक साथ आधुनिक इलाज हो सके। निमहंस जैसे अस्पताल में इलाज के साथ-साथ रिसर्च और नए डॉक्टरों की ट्रेनिंग भी होती है, जिससे भविष्य में विशेषज्ञों की कमी दूर की जा सकती है।
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विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि आजकल नशे की लत के साथ-साथ बच्चों और युवाओं में मोबाइल गेमिंग, ऑनलाइन जुआ और इंटरनेट की लत जैसी नई मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनके इलाज के लिए अलग और विशेष सुविधाओं की जरूरत है, जो इस नए अस्पताल में उपलब्ध होंगी। डॉक्टरों के अनुसार, यह अस्पताल न केवल मरीजों को सस्ता और बेहतर इलाज देगा, बल्कि नॉर्थ इंडिया में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने और सेवाओं को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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