मेनोपॉज के कारण हर 10 में से एक महिला जल्दी ले लेती हैं रिटायरमेंट
ज्योति सिंह
नई दिल्ली । मेनोपॉज महिलाओं के पेशेवर जीवन पर असर डालने वाली गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। हालिया सर्वे के अनुसार, मेनोपॉज में होने वाले शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव से महिलाओं की कार्यक्षमता प्रभावित प्रभावित हो रही है। साथ ही यह आत्मविश्वास, उत्पादकता और कार्यस्थल पर टिके रहने की क्षमता पर भी असर डाल रहा है।
मेनोपॉज की समस्या पर कई वर्षों से काम कर रहीं तमन्ना सिंह कहती हैं कि मेनोपॉज से थकान, मूड स्विंग्स, नींद की कमी और एकाग्रता में गिरावट जैसे लक्षण महिलाओं के करियर की रफ्तार को धीमा कर रहे हैं। मेनोपॉज अनविल्ड रिपोर्ट के अनुसार, मेनोपॉज के कारण लगभग एक-चौथाई महिलाओं को काम के घंटे कम करने पड़ते हैं। हर 10 में से एक महिला जल्दी रिटायरमेंट ले लेती हैं।
20 हजार महिलाओं पर अध्ययन
मेनोपॉज अनविल्ड रिपोर्ट दिल्ली के टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों की 40-55 आयु वर्ग की 20,000 से अधिक महिलाओं पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक 54.5 फीसदी महिलाएं पेरि-मेनोपॉज (शुरुआती चरण) में हैं, 9.1 फीसदी मेनोपॉज चरण में और 27.3 फीसदी पोस्ट-मेनोपॉज में हैं। वहीं, 9.1 फीसदी महिलाएं अनिश्चित स्थिति में हैं। रिपोर्ट के मुताबकि पांच में से एक महिला वित्तीय चिंताओं के कारण मेनोपॉज के उपचार को टाल देती हैं। अधिकांश महिलाएं (54%) और नियोक्ता (73%) मानते हैं कि कार्यस्थल पर इस विषय पर चर्चा की कमी है।
(बॉक्स या ग्राफिक्स)
मेनोपॉज से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं
श्रेणी प्रतिशत
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं 82.11%
शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं 69.43%
त्वचा (डर्मल) समस्याएं 30.03%
यौन स्वास्थ्य समस्याएं 23.44%
महिलाओं में पाए गए प्रमुख लक्षण-
लक्षण प्रतिशत
मूड स्विंग्स / ब्लोटिंग 47.10%
जोड़ों में दर्द 44.10%
वजन बढ़ना / बाल झड़ना / थकान 41.20%
नींद की समस्या / चिड़चिड़ापन 32.40%
पैनिक / एंग्जायटी 29.40%
अनियमित पीरियड्स 26.50%
हॉट फ्लशेस 23.50%
ब्रेन फॉग 20.60%
वेजाइनल ड्रायनेस 11.80%
नाइट स्वेट्स 5.90%
महिलाओं को यौन स्वास्थ्य समस्याएं
समस्या प्रतिशत (%)
सेक्स ड्राइव में बदलाव 55.34%
योनि में सूखापन 52.35%
अनियमित पीरियड 40.56%
स्तनों के आकार में बदलाव 27.77%
पीएमएस की समस्या बढ़ना 12.99%
बार-बार यूटीआ 9.49%
प्रजनन क्षमता में कमी 4.30%
कोट-
मेनोपॉज के लक्षण अक्सर सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को अधिक प्रभावित करते हैं। समाज के लिए इस मुद्दे पर बात करना जरूरी है। नर्सिंग में 85 फीसदी, स्कूलों में काम करने वालों में 53.3 फीसदी और व्यावसायिक कार्यालय कर्मचारियों में 41.7 से 45 फीसदी से अधिक महिलाएं ही हैं। - तमन्ना सिंह, डाइरेक्टर, मेनोवेदा