साइबर सिटी के लोगों में तनाव के कारण याददाश्त में कमी आ रही है। डिमेंशिया जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इस बात का खुलासा पारस अस्पताल द्वारा करीब सात महीने तक किए गए अध्ययन में हुआ है। अस्पताल के डॉक्टरों की ओर से 100 मामलों के विश्लेषण किया गया है। अस्पताल द्वारा संवेदना नाम के सीनियर सिटीजन क्लब की भी मदद ली गई थी।
मंगलवार को आयोजित प्रेसतवार्ता में अस्पताल के डिमेंशिया विशेषज्ञ डॉ. विजय चंद्रा का कहना है कि साइबर सिटी के लोगों में याददाश्त की कमी हो रही है। इसमें 40 से अधिक उम्र वाले भी शिकार हो रहे हैं। इतनी कम उम्र में यह बीमारी होना चिंताजनक है। अस्पताल में हर सप्ताह तीन नए मरीज आ रहे हैं।
डिमेंशिया के 100 मामलों में से 22 मामले एलबीडी के कारण हुए थे जबकि 12 मामले अल्जाइमर रोग के कारण हुए थे। एलबीडी के लक्षण काफी हद तक अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे सामान्य तौर पर अधिक ज्ञात रोगों के समान ही हो सकते हैं।
जिनकी वर्तमान में व्यापक तौर पर पहचान नहीं हो पा रही है। निष्कर्षों से पता चलता है कि इस स्थिति के बारे में आम लोगों के साथ- साथ चिकित्सा समुदाय में भी और अधिक जागरूकता पैदा करने की जरूरत है।
एलबीडी ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कई प्रणाली प्रभावित होती है और इसलिए इसके उपचार के लिए आम तौर पर एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। संवेदना सीनियर केयर की संस्थापक अर्चना शर्मा का कहना है कि डिमेंशिया के प्रारंभिक लक्षणों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है ताकि बीमारी की शुरुआत में देरी करने के लिए रोगी के दिमाग को सक्रिय रखा जा सके। इस अध्ययन का सबसे सकारात्मक पक्ष यह है कि अब अधिक से अधिक लोग शुरुआती अवस्था में ही डिमेंशिया का इलाज कराने के लिए सामने आ रहे हैं।