मई 1980 की भीषण गर्मी में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बांदा की तिंदवारी सीट पर बुलेट के पीछे बैठकर उपचुनाव में प्रचार किया था ताकि उनका चुनावी खर्च बच सके।
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वीपी सिंह को बुलेट पर बैठाकर घुमाने वाले राजेंद्र सिंह
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री होते हुए भी चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने सरकारी अमला साथ नहीं लिया। साथ ही चुनाव खर्च कम से कम करने के लिए उन्होंने चार पहियों की जगह दो पहियों से प्रचार को वरीयता दी। यह बात ग्रेटर नोएडा के अल्फा-1 सेक्टर निवासी और वीपी सिंह के मुख्य चुनाव संयोजक रहे राजेंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताई।
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जिस बुलेट पर बैठकर वीपी सिंह ने किया था प्रचार
- फोटो : अमर उजाला
मूलरूप से इलाहाबाद के मांडा निवासी राजेंद्र सिंह (75) पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री वीपी सिंह एक ही गांव के थे। वीपी सिंह उन्हें छोटे भाई और सहयोगी की तरह मानते थे। 1963 में जब वीपी सिंह राजनीति में नहीं आए थे तभी से वह परिचित थे।
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वीपी सिंह राजेंद्र सिंह की बाइक पर
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि जनवरी 1980 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उन्हें किसी विधानसभा से चुनाव लड़कर विधानसभा में पहुंचना जरूरी था। बांदा की तिंदवारी सीट पर मई में विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद से वह केवल चार बार इस सीट पर प्रचार करने पहुंचे।
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वीपी सिंह को बुलेट पर घुमाने वाला राजेंद्र सिंह
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान उन्होंने सरकार अमले का किसी प्रकार से उपयोग न करने और अधिक चुनावी खर्चा न करने का निश्चय किया था। पेशे से किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 25 साल पहले मांडा से ग्रेटर नोएडा आ गए थे।
इसी बुलेट पर वीपी सिंह को घुमाते थे राजेंद्र सिंह
- फोटो : अमर उजाला
राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह पूरे चुनावी प्रचार में वीपी सिंह जहां भी गए तो उन्हें अपार जनसमर्थन मिला। उन्होंने तिंदवारी उपचुनाव में 92 फीसदी वोट पाए थे। इस दौरान प्रचार पर निकलते समय कार्यकर्ता उनका इतना सम्मान करते थे कि स्वयं अपनी ओर पेट्रोल डलवाकर चुनाव प्रचार में निकलते थे।